अतीत

  • हम जो हैं उसका कारण अतीत में ही है, पर यही रास्ता भी है मुक्ति पाने का।”

 

  • हमें लोगों के कहने की परवाह ज़्यादा है इसलिए अतीत के ढर्रों को छोड़ना मुश्किल लगता है। जो जग गया उसे रात के सपने से क्या मतलब।”

 

  • आशा बचाती है अतीत के कचरे को।”

 

  • हम जो हैं उसका कारण अतीत में ही है, पर यही रास्ता भी है मुक्ति पाने का।” 

 

  • “गलती वो नहीं जो आपने अतीत में करी थी। अतीत में जो हो गया, सो हो गया। अतीत में कोई गलतियाँ नहीं होती। गलती होती है मात्र वर्तमान में।”

 

  • “वर्तमान में अतीत की गलतियों के स्मृति अपने आप में एक बड़ी गलती है। वर्तमान में उपस्थिति नहीं, इससे बड़ी गलती क्या हो सकती है?”

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उपरोक्त सूक्तियाँ आचार्य प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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