भावनाएं

  • “भावना कुछ नहीं है, भावना बस वृत्ति का प्रकट हो जाना है।”

 

  • “मन के तहखाने में जो वृत्तियाँ छिपी रहती हैं, जब वो प्रकट हो जाती हैं तो उन्हें भावना कहते हैं।”

 

  • “भावनाओं में बहने का मतलब है वृत्तियों का दास होना।”

 

  • “भावुक करके ही तुम पर कब्ज़ा किया जा सकता है।”

 

  • “जो भी कोई तुम्हें गुलाम बनाना चाहेगा, एक बात पक्की मान लेना भावुकता का प्रदर्शन ज़रूर करेगा।”

 

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उपरोक्त सूक्तियाँ श्री प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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