भ्रम

  • “तुम्हारे कष्ट ही प्रमाण हैं तुम्हारे भ्रमित होने का।”

 

  • “ये बड़े से बड़े भ्रमों में से एक है कि, “जीवन नहीं बदलूँगा और मन की शान्ति को भी पा लूँगा”।”

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उपरोक्त सूक्तियाँ श्री प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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