संत

  • “कौन है संत’? ‘संत”वही है, जिसको देख कर परमात्मा की याद आए। कौन है महात्मा’? वही जो जब सामने आए तो ये विश्वास सा होने लगे कि परमात्मा होता होगा। इसका होना इस बात का प्रमाण है कि परमात्मा होता होगा। अगर परमात्मा ना होता, तो ये नहीं हो सकता था बस वही महात्मा है, वही संत है।”
  • “जो संत हो जाता है, उसमें वही सब गुण आ जाते हैं जो निर्गुण के हैं।”
  • “जो मौज में रहे अपनीजिसको देने में तकलीफ़ न होती होजिसकी मनोदशा कभी संकीर्ण न होती हो सो संत।”
  • “‘दीनताऔर दीनको देख करके परम की याद कर लेना ये संतत्व है। जहाँ अपेक्षित ही नहीं है, वहाँ भी आपको सत्य दिखाई दे जाए यही संतत्व है।”

  • “संत वो, जिसने शरीर को ‘शरीर’ जान लिया, मन को ‘मन’ जान लिया और आध्यात्म को ‘आध्यात्म’ जान लिया। वो तीनों को मिला नहीं देता है।”
  • “जहाँ सत्य दिखाई दे वही संत है। जिसको देख कर, ‘उसकेहोने में श्रद्धा जाग जाए, वही ‘संतहै। “
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