समाधि

 

 

  • “समाधि की इच्छा से पीछा छुड़ा लेना ही समाधि है।

 

  • “देह से बाहर कोई समाधि नहीं होती, आत्मा नहीं जाती समाधि में, देह ही जाती है, मन ही जाता है; देह, मन एक हैं। “
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