साधु

  • “साधु वो, जो अच्छे से जान गया है कि संसार को जीता नहीं जा सकता।”
  • “साधु कौन? जो तुम्हारे मन को तुम्हारी आत्मा के संग कर दे।”
  • “साधु कौन? जिसके समीप आओ, तो अपने समीप आ जाओ; जिसके करीब आने से तुम अपने करीब आ जाते हो सो साधु, और सो ही राम भी, सब एक हैं।”

  • साधु राम तक जाने का ज़रिया नहीं हैसाधु ही राम है 

  • “यही साधु की परिभाषा है: जिसके पास रहने से अचानक दिखाई देना शुरू  हो जाए, अचानक बोध जागृत हो जाए, वही साधु है।”

  • जिसकी समीपता में तुम दर्शन के काबिल हो जाओ वो साधु है।

  • “जिसके सामीप्य में तुम्हारी दृष्टि निर्मल हो जाए, वही साधु है। जिसके पास रहने से दर्शन होने शुरू हो जाते हैं, वो साधु है। जिसके पास रहने से परमात्मा के दर्शन शुरू हो गए वो महात्मा है।”
  • “साधु वही जो विक्षिप्तता दूर कर दे, विक्षेप हटा दे।

 

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उपरोक्त सूक्तियाँ श्री प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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