स्वभाव

 

  • “प्रभावों से इन्कार ही स्वभाव का स्वीकार है।”

 

  • “हमारा स्वभाव है, मुक्त रहना, स्वतंत्र रहना।”

 

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उपरोक्त सूक्तियाँ श्री प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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