शिक्षा के दो आयाम

वक्ता- निशा का सवाल है कि जीवन में शिक्षा की आवश्यकता है ही क्यों? है किसलिए शिक्षा? ज़िन्दगी चमकाने के लिए, पैसे कमाने के लिए, किसी प्रोफेशन में जाने के लिए? क्या है शिक्षा?

निशा, शिक्षा दो प्रकार की होती है- पहली शिक्षा होती है दुनिया को जानने की। ये एक निचली शिक्षा है, ये निम्नतर शिक्षा है जिसमें आप जानते हो कि जग कैसा है, जिसमें आप जग में जो भाषाएँ बोली जाती हैं उनका ज्ञान लेते हो, हिंदी का, अंग्रेजी का, जिसमें आप देखते हो कि आज तक इस जगत में क्या होता रहा है तो आप  इतिहास पढ़ते हो। आप जानना चाहते हो कि पृथ्वी पर किस-किस तरीके के आकार हैं, तो आप भूगोल पढ़ते हो- नदियाँ, पहाड़, रेगिस्तान। ये सब जगत के बारे में जानकारी है जो आपको मिल रही है।

आप जानते हो कि कौन-कौन-सी तकनीकें हैं, विज्ञान कहाँ तक पहुँच गया, प्रौद्योगिकी कहाँ तक पहुँच गई तो आपको पता चलता है कि ये विद्युत् मोटर कैसे काम करती है, वो कैथोड रे ट्यूब कैसे काम करती है, इसके भीतर जो चिप्स लगीं हैं वो कैसे काम करती हैं, ये सब जानकारी आपको बाहरी दुनिया के बारे में मिल रही है और ये शिक्षा आवश्यक है।

लेकिन अलग है एक दूसरे प्रकार की शिक्षा, जो केंद्रीय है, जो परम आवश्यक है। हमारी शिक्षा व्यवस्था वो देती नहीं। वो कौन सी है जिसको मैं कह रहा हूँ उच्चतर शिक्षा? वो शिक्षा है स्वयं को जानने की।

निम्नतर शिक्षा है जगत को जानने की और उच्चतर शिक्षा है स्वयं को जानने की।

याद रखना ये सब कुछ जो तुमने बाहर जाना, चाहे वो भाषाएँ हों, चाहे गणित हो, चाहे प्रोद्योगिकी हो, इतिहास हो, कुछ भी। ये सब कुछ तो तुमने जाना ये बाहरी है इसके बारे में तुमने जान लिया पर अब तुम्हें रहना तो अपने साथ है, इस मन के साथ, अपने साथ ही जीवन है सारा। इस मन को नहीं जाना तो कुछ नहीं जाना, बिलकुल अनपढ़ ही रह गए। असली शिक्षा ये नहीं है कि उस बाहरी-बाहरी को जान लिया और कोई रोज़गार मिल गया। असली शिक्षा है खुद को जानना और जब आदमी स्वयं को नहीं जानता और बाहरी शिक्षा से भरा हुआ होता है, उस निम्नतर शिक्षा से, तो फ़िर दुनिया वैसी हो जाती है जैसी हमारे चारों तरफ है- smart phones and stupid people, guided missiles and unguided men.

बाहर बड़ी चकाचौंध रहेगी क्योंकि हमने बड़ी महारथ हासिल कर ली होगी कि और कुशलता कैसे ले आयें, तुमने इंजन बहुत अच्छे बना लिए होंगे, तुम्हारे कम्प्यूटर्स की क्षमता दिन-दूनी रात चौगुनी बढ़ रही होगी, आदमी अंतरिक्ष में पता नहीं कहाँ-कहाँ पर पहुँच रहा होगा, नए-नए ग्रह, तारे, ये सब चल रहा होगा।  बाहर बड़ी प्रगति दिखेगी, लेकिन भीतर? भीतर कोलाहल मचा रहेगा, अशांति रहेगी, बेचैनी रहेगी, असुरक्षा की भावना रहेगी और जीवन नर्क रहेगा क्योंकि जो उच्चतर शिक्षा है वो नहीं मिली। ख़ुद को नहीं जाना। किताबें बहुत पढ़ीं, कभी अपने-आप को नहीं पढ़ा और दुर्भाग्य की बात ये है कि हम सबकी आजतक शिक्षा सिर्फ़ वो निम्नतर शिक्षा ही रही है। जो असली शिक्षा है वो हमारी कभी हुई ही नहीं, ना घर में, ना स्कूल या कॉलेज में, वो हमें कभी मिली ही नहीं और जब आपका अपना मन शांत नहीं है तो आपने बहुत टेक्नोलॉजी विकसित भी कर ली तो उसका उपयोग क्या करोगे? सिर्फ विध्वंस के लिए। आप रह रहे होंगे बड़े आलीशान घर में, हो सकता है आपने सड़कें बहुत अच्छी बना ली हों, आपकी अभियांत्रिकी बहुत अच्छी हो गई हो, पर सड़क रहेगी साफ़ और मन रहेगा गन्दा।

चाहिए ऐसा जीवन?

शिक्षा को रोज़गार का साधन मत मान लेना। तुम इसलिए नहीं पढ़ रहे हो कि तुम्हें एक डिग्री मिल जाये और एक नौकरी मिल जाए। वास्तविक शिक्षा है जानना अपने आप को। हाँ, ठीक है उस सब की भी आवश्यकता है कि भाषाएँ सीख ली, गणित सीख ली, विज्ञान सीख लिया, उस सब की भी आवश्यकता है लेकिन वो हमेशा गौण है, निम्नतर है। जगत के बारे में शिक्षा भी महत्वपूर्ण है। ठीक है, जानो उसको, जानने में कोई बुराई नहीं है पर वो जानना काफ़ी नहीं। निम्नतर शिक्षा आवश्यक है पर काफ़ी नहीं।

शिक्षा को समझो। जो तुम्हें तुम्हारे करीब ले आए वही असली शिक्षा है।

संवाद पर आधारित।  स्पष्टता हेतु कुछ अंश प्रक्षिप्त हैं।

संवाद देखें: http://www.youtube.com/watch?v=vrSilQhGQ-k

2 टिप्पणियाँ

    • प्रिय विपुल जी,

      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन की ओर से हार्दिक अभिनन्दन! यह चैनल प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित किया जाता है एवं यह उत्तर भी उनकी ओर से आ रहा है | बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहें हैं| फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:

      1. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार: यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है। इस विलक्षण अवसर का लाभ उठाने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91-9818585917

      2: अद्वैत बोध शिविर: प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन द्वारा आयोजित अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अलौकिक अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित ३५+ बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।

      इसके अतिरिक्त, हम बच्चों और माता-पिता के रिश्तों में प्रगाढ़ता लाने हेतु समर्पित बोध-शिविर का आयोजन करते हैं। इन शिविरों का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661

      3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण: आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं। सत्र का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अपार: +91-9818591240

      4. जागृति माह: फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित आधारभूत विषयों पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं। सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917

      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगे।
      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

      पसंद करें

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s