विश्वास क्या है?

प्रश्न : विश्वास क्या है?

वक्ता : विश्वास का अर्थ है- मानना । विश्वास का अर्थ है कहना कि ‘ऐसा है’ । ये जो वाक्य है, ‘ऐसा है’, इसको तीन-चार अलग अलग तलों पर कहा जा सकता है । सबसे नीचे का जो तल है, वो है ‘अंधविश्वास’।  उसके ऊपर है, ‘विश्वास’ । उसके ऊपर आता है, ‘विचार’ और उसके भी ऊपर आता है, ‘समझ’ ।

‘अंधविश्वास’, ‘विश्वास’,’विचार’, ‘समझ’ । ये चार ताल हैं ये कह पाने के कि ‘ऐसा है’ ।

जो सबसे निचला तल है, जो सबसे बंद मन है, वो किसमें जीएगा ?

श्रोता १ : अंधविश्वास ।

वक्ता : ऐसा मन विचार तक भी नहीं करेगा । उसको तुम कुछ भी कह दो, वो बोलेगा, ‘हाँ, बात चली आ रही है पाँच सौ सालों से, ठीक है ही ।’ वह सोच भी नहीं पाता । पूरी तरह अंधा है, मन की आँखें बिलकुल बंद ।

उसके ऊपर आता है, विश्वास । ये आदमी थोड़ा तर्क करेगा, इधर-उधर से कुछ बात पूछेगा, लेकिन जल्दी ही मान लेगा । कर लिया विश्वास । समझा नहीं है, जाना नहीं है, लेकिन विशास कर लिया है । किस आधार पर विश्वास किया है? कि जो बता रहे होंगे, वो ठीक ही कह रहे होंगे- ये उसका तर्क है । ‘किताबों में लिखा है, शिक्षक बता रहे हैं, माँ-बाप बता रहे हैं, तो ठीक ही बता रहे होंगे।’

उसके ऊपर आता है वो व्यक्ति जो विचार करता है । जो ‘विचारक’ है । ये किसी भी बात को आसानी से नहीं मान लेता । ये खूब बहस करता है । ये ‘वैज्ञानिक’ है, ये प्रमाण माँगता है । लेकिन इसके साथ दिक्कत ये है कि ये वहीँ तक जा पाता है, जहाँ तक प्रमाण उपलब्ध हैं । जिस बात का प्रमाण मौज़ूद नहीं, ये उसको मानने से इनकार कर देता है ।

अब ‘प्रेम’ का तो कोई प्रमाण नहीं होता । तो ये मानेगा ही नहीं कि प्रेम जैसा भी कुछ है । उसको तुम ये कहो कि ‘स्वतंत्रता सबसे कीमती है’, तो ये मान नहीं पाएगा । क्यों ? क्योंकि कोई प्रमाण नहीं है । ये कहता है, ‘मेरे सामने प्रमाण रखो, तो मानूँगा।’ अब कैसे प्रमाण लाकर रखोगे? तो ये बहुत ऊँचा है, बहुत बढ़िया आदमी है, लेकिन इसके साथ एक कमज़ोरी जुड़ी हुई है कि ये प्रमाण  का ग़ुलाम हो गया है । और प्रमाण भी कैसा ? जो मन को समझ में आये । ये ‘विचारक’ है ।

ऐसे लोग भी कम होते हैं। मैं ये नहीं कह रहा कि ये निचले स्तर का आदमी है। यहाँ तक पहुँचना भी बड़ा मुश्किल है। बहुत कम लोग हैं जो इस तल तक भी आ पाते हैं। लेकिन ये तल सबसे ऊँचा नहीं है, क्योंकि इसके साथ एक कमजोरी है कि बिना प्रमाण के ये कुछ मानता ही नहीं ।

सबसे ऊँचे तल पर कौन बैठा है ?

श्रोता २ : जो आदमी समझता है ।

वक्ता : जो आदमी समझता है, वो सबसे ऊपर बैठा हुआ है । जो समझता है, वो सोचता तो है, उसके पास विचार की शक्ति तो है ही, पर इसके अलावा उसके पास कुछ और भी है । उसके पास ‘ध्यान‘ है।  वो सोच तो सकता ही  है, लेकिन साथ ही साथ समझ भी सकता है । वो वहाँ भी जा सकता है, जहाँ ‘विचार‘ नहीं जा सकता । इसलिए वो उन बातों को भी समझ पाता है जिनका कोई प्रमाण नहीं है । ये सबसे ऊँचा आदमी है ।

अब तुम देख लो कि तुम्हें कहाँ पर होना है । जीवन कहाँ पर बिताना है । कहाँ पर जीवन बिताना चाहते हो ? अंधविश्वास में, विश्वास में, विचार में, या समझ में ?

श्रोतागण : समझ में।

वक्ता : अब वो तुम्हारे ऊपर है ।

श्रोता २ : सर, हमारे धर्मग्रंथों में तो कहीं नहीं लिखा है कि उन पर विश्वास करो।

वक्ता : यही तो विडंबना है ना। कहीं लिखा नहीं है, पर फिर भी पढ़ा हुआ है, क्योंकि जनश्रुति यही कहती है, क्योंकि परंपरा यही बनी हुई है । क्या तुम्हारे घर में बाइबिल है ?

श्रोता २ : नहीं।

वक्ता(हँसते हुए) : क्यों नहीं है ? इसको देखो ना ! बाइबिल बिल्कुल नहीं कहती कि उसे हिन्दू के घर में ना रखो । पर फिर भी तुम्हारे घर में नहीं है । बाइबिल ने कहा है क्या कि उसे ना रखो ?

श्रोता २ : नहीं।

वक्ता : इतने सारे दार्शनिक हुए, विचारक हुए, संत हुए, चीन में हुए, यूरोप में हुए। किसी की भी कोई किताब क्या है तुम्हारे घर में?

श्रोता २ : नहीं।

वक्ता : लेकिन रामायण होगी, गीता भी होगी । क्यों है ? क्योंकि एक परंपरा है, और उस परंपरा के आगे हम देख ही नहीं पाते ।

श्रोता २ : तो फिर जो इन ग्रंथों में और किताबों में लिखा है, क्या वो सत्य नहीं है ?

वक्ता : क्या उस सत्य को तुमने जाना है, या कहीं से सुना है ?

श्रोता २ : सुना है ।

वक्ता : अभी आदित्य से पूछा जाए, ‘सर्वश्रेष्ठ धर्म कौन सा है ?’ तो उसका क्या जवाब होगा ? ‘हिन्दू धर्म।’ अभी यही सवाल असलम से पूछा जाये तो वो क्या बोलेगा ? ‘इस्लाम।’ और एंजेला बैठी हो तो क्या जवाब होगा? ‘ईसाई धर्म।’ इन्होंने ये जाना है, या क्योंकि ये उस धर्म के हैं, इसलिए बोल रहे हैं ?

श्रोतागण : सर, समझ में आ गया कि सुनी सुनाई बातों पर विश्वास नहीं करना है । अपनी समझ का प्रयोग करना है ।

– ‘संवाद’ पर आधारित। स्पष्टता हेतु कुछ अंश प्रक्षिप्त हैं ।

इस विषय पर और लेख पढ़ें:

लेख १                   लेख २                  लेख ३

संवाद देखें: http://www.youtube.com/watch?v=ZU5HtkGfujE

2 टिप्पणियाँ

    • प्रिय कीर्ति जी,

      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन की ओर से हार्दिक अभिनन्दन! यह चैनल प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित किया जाता है एवं यह उत्तर भी उनकी ओर से आ रहा है | बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहें हैं| फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:

      1. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार: यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है। इस विलक्षण अवसर का लाभ उठाने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91-9818585917

      2: अद्वैत बोध शिविर: प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन द्वारा आयोजित अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अलौकिक अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित ३५+ बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।

      इसके अतिरिक्त, हम बच्चों और माता-पिता के रिश्तों में प्रगाढ़ता लाने हेतु समर्पित बोध-शिविर का आयोजन करते हैं। इन शिविरों का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661

      3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण: आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं। सत्र का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अपार: +91-9818591240

      4. जागृति माह: फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित आधारभूत विषयों पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं। सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917

      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगे।
      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

      पसंद करें

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s