अच्छा आदमी कौन?

श्रोता : सर मेरा सवाल आपसे ये है कि अच्छा आदमी कौन है

वक्ता : सबसे अच्छे आदमी तुम हो | क्या नाम है तुम्हारा?

श्रोता : सुमित |

वक्ता : सुमित का सवाल है कि अच्छा आदमी कौन है? सुमित अभी मैंने कहा तुमसे कि डूबो ज़िन्दगी में | कहा था ? जीवन ठीक अभी है और ठीक अभी जीवन के अवसर का उपयोग किसने किया? सवाल किसने पूछा? सवाल सुमित ने पूछा |

जो जीवन को जिए वही अच्छा आदमी है | और जीवन को जो मुर्दों की भांति काट दे वही बेकार आदमी है | जीवन एक अवसर है, कह सकते हो एक पार्टी है | जो उसमें शामिल हो ले, जो उसमें डूब ले, वही अच्छा | और जो उससे कटा-कटा सा, अनमना सा बिता दे, वही बेकार, वही मूर्ख |

पर मुझे पता है कि तुम्हारी नज़र में अच्छे और बुरे कि दूसरी अवधारणाएं हैं | तुम सोचते हो कि अच्छा वो जो कुछ नैतिक नियमों का पालन करता है | और तुम सोचते हो कि बुरा वो जो उन नियमों को तोड़ देता है |

तुम सोचते हो अच्छा वो है जो दूसरों कि मदद कर दे | सच बोलता हो, गाली-गलौच ना करता हो | और इस तरह की दो-चार बातें और | वो सब बिल्कुल भूल जाओ | ये बात ध्यान रखना कि ये सवाल पूछने के लिए तुम्हें ध्यान से देखना पड़ा कि क्या सवाल है जो मन में है और जो पूछने काबिल है | ध्यान |इसका नाम क्या है ध्यान | तुमने ध्यान से अपने आप को देखा, ये सवाल जो पूछा गया ये छोटी चीज़ नहीं है | इसकी पूरी प्रक्रिया को देखो | सबसे पहले तो तुमने ध्यान से देखा कि क्या है जो मैं पूछ सकता हूँ? दूसरी बात कि तुमने निडरता से खड़े होकर वो सवाल पूछ भी लिया | हम में कुछ लोग होंगे जो ध्यान से देख भी नहीं पाये होंगे कि क्या है जो मेरी ज़िन्दगी में पूछने लायक है?और बहुत सारे ऐसे हैं जिन्होंने सवाल लिख तो लिए हैं पर डरे हुए हैं, उठ करके पूछ नहीं पा रहे | सवाल सब के ही पास हैं ना? जब मैंने पुछा था कि कितने लोगों के पास सवाल हैं? सब के पास सवाल हैं | पूछा अभी किसने तुरंत ? सुमित ने पूछा |

तो अच्छे आदमी के बस यही दो लक्षण | पहला ध्यान और दूसरा उस ध्यान से निकला हुआ निडर कर्म | अच्छे आदमी के बस यही दो लक्षण | पहला ध्यान | ध्यान कहाँ होता है? ध्यान मन में | ध्यान कहाँ है? मन में | ध्यान से देख रहा हूँ |कम्पलीट अटेंशन  |और उसी का मतलब है डूब जाना | कम्पलीट इमर्शन |

पहली बात ध्यान और दूसरी बात कि मन में जो ध्यान है वो फिर सांसारिक रूप से संसार में कर्म भी बने | ऐसा ना हो कि कर्म बनते-बनते बीच में दूसरी बाधाएँ आ गयीं, डर आ गया, संकोच आ गया, दुविधाएँ आ गयीं  | सोचना शुरू कर दिया कि और लोग क्या बोलेंगे | तो ध्यान से मैं जानू और जो जानू उस पर चलूँ  | क्या बोली दो बातें?

पहली बात ध्यान से जानूँ और दूसरी जो जानूँ उस पर चलूँ भी |और पहली और दूसरी जुडी हुई हैं | अगर ध्यान में गहराई है, अगर ठीक-ठीक जाना है तो उस पर चलोगे ही| अक्सर चल वो ही नहीं पाते जिन्होंने जाना ही नहीं है | अगर तुम्हे पक्का है कि जो मेरा सवाल है, वो महत्त्वपूर्ण है पूछा जाना ही चाहिए तो तुम पूछ ही लोगे | अगर पक्का है तुम्हें कि तुम्हारा सवाल महत्त्वपूर्ण है तो तुम कहोगे कि तो हँसे, मैं पूछूँगा |

मेरे लिए महत्त्वपूर्ण है ध्यान से जानना, ध्यान से देखना और फिर जो समझ में आया उस पर अमल भी करना | उस पर क्या करना ? अमल भी करना | बस यही अच्छे आदमी के लक्षण है |

बाकी सारी  नैतिकता भुला दो | भूल जाओ कि जो दूसरों कि मदद करे वो अच्छा आदमी है, ये सारी बातें पीछे छोड़ दो | कोई भी स्थिति हो उसमें होश कायम रखो | पहला लक्षण अच्छे आदमी का | होश कायम रहे, बेहोशी नहीं | यही ध्यान है और दूसरी बात कि उस होश के फलस्वरूप जो उचित है वो हो | वो बाधित ना होने देना | क्योंकि होने और करने में जरा सा अन्तर तो होता ही है | बित्ते भर का फासला हमेशा होता है जानने में और उसको अमल करने में, उसे कर्म में उतारने में एक हलकी सी दूरी होती है | और हम में से अधिकतर लोग उस दूरी को पार नहीं कर पाते | जान भी जाते हैं तो उसे कर्म में नहीं उतार पाते | ऐसा देखा है कि नहीं? कि जानता तो हूँ पर कर नहीं पाता | ऐसा देखा है ना | उससे भी बचना है | जानने में पूरी गहराई और जो जाना उस पर निडरता से निःसंकोच अमल | बस यही है अच्छा आदमी |

अच्छा आदमी कौन है, इस बारे में जो कहा गया उस बारे में और जानना है | देखो, दो तरीके से अच्छे और बुरे का निर्धारण हो सकता है | पहला ये कि बचपन से ही हमे बता दिया गया है क्या अच्छा और क्या बुरा | सबको पता है कि झूठ बोलना बुरा है, पढ़ाई में मन लगान अच्छा है, दूसरों को सताना बुरा है | बड़ों को आदर देना अच्छा है | ये सारी बातें बाहर से आयीं है और समय, काल, परिस्थिति के अनुसार बदलती भी रहती हैं | आज एक देश में जो अच्छा है, दूसरे देश में वही चीज़ बुरी मानी जाती है | एक देश में जो बात वैध है, दूसरे देश में बिलकुल अवैध है | और देशों को छोड़ दो |कुछ प्रांतों में जो चीज़ ठीक है क़ानून की नज़र में, दूसरे प्रांत में वही चीज़ गलत है | एक धर्म में जो चीज़ अच्छी मानी जाती है, दूसरे धर्म में वही बात बिलकुल बुरी मानी जाती है | एक घर में जो बुरा माना जाता है, दूसरे घर में वो बुरा माना जाता है | ये अच्छे और बुरे बाहर से आये हैं और ये बदलते रहेंगे |

तुम्हारे सीनियर्स से बात कर रहा था, पीछे साल की बात है | तो मैंने उन्हें कहा कि तुम्हारे ही देश में और देश के इसी इलाके में आज से सिर्फ कुछ सौ साल पहले तक सती की प्रथा बिलकुल अच्छी मानी जाती थी | अच्छी ही नहीं मानी जाती थी, जो औरत पति के साथ जल मरे उसे देवी माना जाता था मंदिर भी बना दिए जाते थे उस के लिए | वो बात आज भारत में अपराध है | कानूनी रूप से अपराध है | और कानूनी रूप से जो है, सो है | तुममें से कितने लोग हो जो उसको सही समझोगे ? कितनी लडकियां हैं जो सही समझेंगी कि जब पति की चिता जल रही होगी तो हम भी कूदेंगे उसमे | यही अच्छा है | तो ये अच्छे-बुरे बदलते रहते हैं |

जो भी अच्छा-बुरा बाहर से आएगा, उसमे कोई दम नहीं होगा | वो लगातार बदलता रहेगा | और वो तुम्हारा अपना भी नहीं होगा |पहली बात कि लगातार बदलता रहेगा और दूसरी बात कि तुम उस पर चल भी नहीं पाओगे |

हर बच्चे को सिखा दिया जाता है कि सच बोलो, झूठ मत बोलो पर फिर भी दुनिया झूठों से भरी हुई है | हर बच्चे को बताया जाता है कि हिंसा गलत है लेकिन फिर भी दुनिया हिंसक लोगों से भरी हुई है | तो जब भी सच-झूठ के पैमाने तुम्हे बाहर से थमा दिए जायेंगे,पहली बात कि उनमे दम नहीं होगा, वो लगातार बदलते रहेंगे और दूसरी बात कि तुम उन पर चल भी नहीं पाओगे | उन पर अमल भी नहीं कर पाओगे क्योंकि वो तुम्हारे अपने नहीं हैं | ये सच और झूठ वो हैं जो बाहर से आ रहे हैं | ये उचित-अनुचित वो है, ये अच्छे-बुरे वो हैं जो बाहर से आ रहे हैं | इनमे कोई दम नहीं है | ये तुम्हारी अपनी चेतना से नहीं आये हैं |

एक दूसरा तरीका भी होता है ये जानने का कि क्या अच्छा है क्या बुरा | वो असली तरीका होता है | वो दूसरा तरीका वही है जो मैंने तुमसे बोला था- ध्यान का | मेरे पास अपनी समझ है, अपनी आँखें है, मैं देखूंगा, मैं समझूंगा | और फिर उस समझ के फलस्वरूप जो ठीक लगेगा वही करूँगा, वही अच्छा है | होश में जो किया जाए वही अछा है, और बेहोशी में जो किया जाए वही बुरा हैये दूसरा तरीका है |

पहला तरीका है अच्छे-बुरे का कि मुझे जो दूसरों ने बता दिया अच्छा है, मैंने मान लिया अच्छा है | मुझे जो दूसरों ने बता दिया बुरा है, मैंने मान लिया बुरा है | ये पहला तरीका है ज़िन्दगी जीने का | और दूसरा तरीका है कि मैं अपनी नज़र से देखूंगा, और होश में मुझे जो बात समझ में आती है वही करूँगा, यही अछा है |और जब कभी मैं बेहोश हो जाऊँ और अपनी जानी बात पर अमल ना करूँ तो वही बुरा है | आयी बात समझ में ?

-‘संवादपर आधारित।स्पष्टता हेतु कुछ अंश प्रक्षिप्त हैं।

संवाद देखें:http://www.youtube.com/watch?v=cinjF64tWso

2 टिप्पणियाँ

    • प्रिय ऋषभ जी,

      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन की ओर से हार्दिक अभिनन्दन! यह चैनल प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित किया जाता है एवं यह उत्तर भी उनकी ओर से आ रहा है | बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहें हैं| फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:

      1. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार: यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है। इस विलक्षण अवसर का लाभ उठाने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91-9818585917

      2: अद्वैत बोध शिविर: प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन द्वारा आयोजित अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अलौकिक अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित ३५+ बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।

      इसके अतिरिक्त, हम बच्चों और माता-पिता के रिश्तों में प्रगाढ़ता लाने हेतु समर्पित बोध-शिविर का आयोजन करते हैं। इन शिविरों का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661

      3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण: आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं। सत्र का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अपार: +91-9818591240

      4. जागृति माह: फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित आधारभूत विषयों पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं। सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917

      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगे।
      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

      पसंद करें

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s