प्रेम तुम्हारी दुनिया बर्बाद कर देगा

वक्ता : प्रेम क्या होता है ? तुम बताओ क्या होता है ?

श्रोता :  सर अभी तक जो भी सोचा था, वो सब बोलते हैं ये भी नहीं होता, ये भी नहीं होता, ये भी नहीं होता |

वक्ता : क्या होता है इश्क़? इतने खाली तो नहीं हो कि पता नहीं है, कुछ तो पता होगा ही, कोई मूवी आयेगी और उसमें ये लिखा होगा कि ये लव स्टोरी है तो बोलोगे क्या कि पता नहीं ये किस बारे में है ?

श्रोता : सर जहाँ तक देखा है, समझा है ‘लव’ तब है जब, आप अपने बारे में कम और दूसरों के बारे में ज्यादा सोचते हैं |

वक्ता : वो तो तब भी होता है जब किसी ने तुम्हारे पैसे उधार ले लिए हों |

(सब हँसते हैं)

श्रोता १ : लव इज़ फ्रीडम |

श्रोता २ : बता नहीं सकते पर आपको महसूस होता है |

वक्ता : क्या ?

श्रोता ३ : एक स्टेट है जिसमें मैं आपके बारे में सोच रहा हूँ | वो कब से सोच रहा हूँ, क्यों सोच रहा हूँ नहीं पता, पर मैं आपके बारे में सोच रहा हूँ |

वक्ता : किसी के बारे में सोचना, ये प्यार है ?

श्रोता : हाँ

वक्ता : ईमानदारी से बताओ, तुम जो भी सोचोग किसके लिए सोचोगे ?

श्रोता : सर अपने लिए |

वक्ता : तुम सोचो कि तुम किसी और के बारे में सोच रहे हो, किसी दोस्त के बारे में सोच रहे हो पर वो दोस्त किसका होगा ?

श्रोता : मेरा

वक्ता : तो घूम फिरकर तुम जो भी सोचोगे किसके लिए सोचोगे ?

श्रोता : अपने लिए

वक्ता : तो अगर तुम किसी के लिए सोच रहे होगे तो फायदा किसका देख रहे होंगे ?

श्रोता : अपना

वक्ता : तुम भले ही ये कहो कि “ मुझे तुम्हारी याद आ रही है”, पर उसमें महत्वपूर्ण क्या है ? ‘मुझे’ |

मुझे कुछ मिल नहीं रहा है जो मैं चाहता हूँ कि मैं तुम्हें यहाँ चाहता हूँ | तुम्हें का मतलब तुम्हारा शरीर और कोई इच्छा है जो पूरी नहीं हो पा रही है और हम कहते हैं, “आई एम मिसिंग यू”.

इस स्वार्थ को प्यार कहना है या कुछ और है मामला? ये पक्का  हो पा रहा है कि जिससे प्यार करोगे उसके बारे में सोच नहीं सकतेफिर और अगर किसी के बारे में बहुत सोचना पड़ रहा है तो वो प्यार नहीं है कुछ और है | कौन कौन लोग अपने प्यार के बारे में बहुत सोचते हो गर्लफ्रेंड, बॉयफ्रेंड ?

श्रोता : सर गर्लफ्रेंड,बॉयफ्रेंड के पैरामीटर पर ही तो प्यार को डिफाइन नहीं किया जा सकता ?

वक्ता : हमारा और कौन सा होता है ?

श्रोता : सर किसी के बारे में डेडिकेटेड हैं तो |

वक्ता : तो सोचते हो ? तो क्या प्यार खूब सारे सोचने का नाम है ?

श्रोता : बिल्कुल नहीं

वक्ता : पर तुम तो बड़े खुश हो जाते हो जब कोई बताता है, पता है सारी रात तेरे बारे में सोचता रहा |

(सब हँसते हैं)

वक्ता (व्यंग्य से) : आह, सो क्यूट | तुझे पता है वो सारी रात न मेरे बारे में सोचता है |

(सब हँसते हैं)

वक्ता : “यू नो ही इज़ सो पोज़ेसिव” | “बड़ा प्यारा है, वो बिल्कुल मर जाता है अगर मुझे किसी के साथ देख ले” | प्यार है ? तो गड़बड़ हो गयी।  हम तो जो कुछ भी जानते  हैं जिस भी चीज़ को कहते भी हैं कि मैं जानता हूँ, उस जानने का मतलब ही यही होता है सोचना और सोचने में पक्का ही है कि प्यार नहीं है कुछ और चल रहा है | प्यार के मज़े ही सोचने में है | ’ मुझे आदर्श नहीं असली उत्तर दो |

श्रोता : थॉट


प्रेम तुम्हारी दुनिया बर्बाद कर देगा 1वक्ता :
 थॉट! आप से अच्छी आपकी यादें  हैं जो कभी जाती नहीं  “द ब्लडी प्लेज़र ऑफ़ जस्ट फैंटसाइजिंग एंड इमैजिनिंग एंड हैविंग द फ़ोटोग्राफ़ इन फ्रंट ऑफ़ यू एंड द मेमोरी इन फ्रंट ऑफ़ यू |  दैट्स द एंटायर अट्रैक्शन ऑफ़ लव | वो इमेज है, एक मनोहर इमेज और वो इमेज लव हो नहीं सकती| इमेज तो थॉट है और थॉट में तुम कर तो खुद से ही प्यार रहे हो | इसको  नारसिसिस्म बोलते है और ईगो और किसी से प्यार कर भी नहीं सकती वो सिर्फ अपने से ही प्यार करती है तो घूम फिर कर हम खुद से ही प्यार करते  हैं | हम सेल्फ लवर्स हैं और ये बड़ी खतरनाक बात है | लिटरली एंड फिजिकली,  प्लीजिंग आवर ओन सेल्फ ऐट ऑल लेवल्स| अच्छी  से अच्छी लव स्टोरी होती है, वो ख़त्म होती है?

श्रोता : शादी पर

वक्ता : कभी ये सवाल पूछा है कि ये ख़त्म क्यों हो गयी ? आगे का क्यों नहीं दिखा रहे वो| एक गन्दी सी लाइन लिख कर छोड़ देते  हैं | …  एंड दे लिव्ड हैप्पिली एवर आफ्टर…  नहीं ये नहीं, ऐसे नहीं चलेगा पार्ट- २ बनाओ ।  क्योंकि कहानी अभी शुरू हुई है, हमें जानना है अब क्या होगा, बिकाउज़ वेन दैट इज़ एक्चुऐली अवेलेबल, द बॉडी इज़ देएर नाउ, राईट इन योर होम, राईट इन योर बेड, तो आकर्षण ही नहीं है, इसमें रखा क्या है ? मज़ा तो कल्पना में हैं | वो अब ख़त्म हो गयी है| मुझे ये बताओ अगर प्यार में सोच नहीं सकते तो करोगे क्या? मज़ा तो सोचने में ही है | रात में बैठे हो, हॉस्टल में चल रहा है F.M., रोमांटिक गाने आ रहे हैं |

फिर क्या है प्यार ?

श्रोता : सर तभी तो आपसे पूछ रहे हैं |

वक्ता : मैं कैसे जानूँ ?

श्रोता : एक्सेपटेंस !

वक्ता : तुम सोच सोच कर ही एक्सेप्ट करते हो | कभी बिना सोचे एक्सेप्ट किया है ?

श्रोता : (हँसते हुए ) सर एक्सेप्टेंस मतलब किसी  चीज़ से प्यार नहीं है, कोई विषय-वस्तु नहीं है, किसी शरीर मात्र से प्यार नहीं है |

वक्ता : ये मत कहो कि नहीं है, ये कहो कि सिर्फ यही नहीं है |

श्रोता : मान लें एक टाइम के बाद अब ये नहीं हैं पर सर किसी का प्रजेंस प्रेज़ेस भी तो अच्छा लगता है |

वक्ता : किसको ?

(सब श्रोतागण हसने लगने लगते हैं )

वक्ता : तो बड़ा कौन हुआ ? उसका होना या उसका जिसको अच्छा लग रहा है ?

श्रोता : जिसको अच्छा लग रहा हैं है |

वक्ता : बहुत ध्यान से देखो, मुझे इसकी उपस्थिति अच्छी लगती है, थोड़े देर में, अब मुझे इसकी उपस्थिती अच्छी नहीं लगती, तो बड़ा कौन हुआ, ये या मैं ?

सभी श्रोता : हम

वक्ता : उसकी तो कोई कीमत ही नहीं है न, कीमत इस बात की है कि आज तक मुझे अच्छा लगता था और अब अच्छा ?

श्रोता : नहीं लगता

वक्ता : तो राजा कौन ? मैं |  हमें तुम अच्छे लगे सामने बैठो, अच्छे नहीं लगे पीछे बैठो, तो ये क्यों कहते हो कि मुझे तुमसे प्यार है ? ये बोलो न कि मुझे अपने आप से प्यार है, मुझे अपने आकर्षण से प्यार है, क्या है प्यार फिर ? मामला क्या है ? अगर सोच नहीं सकते, अगर अहंकार नहीं हो सकता  उसमें तो फिर वो क्या है ?

श्रोता : आज़ादी

वक्ता : कैसी आज़ादी ?

श्रोता : विचारों की

वक्ता : सोचने  की आज़ादी, सोचो फिर कल्पना करो, आज़ादी ही आज़ादी  है, उसमें कौन आ सकता है |

श्रोता : इज्जत कि वो यहाँ हो तो वो किसी और के साथ भी हो सकता है |

वक्ता : तुम किसी की आज इज्ज़त करते हो और कुछ समय बाद नहीं करते हो, तो बड़ा कौन? अभी भी इज्ज़त देने वाला तो मैं ही हूँ न | मेरी मर्ज़ी  की बात है, दिया तो दिया, नहीं दिया तो नहीं दिया |

श्रोता : सर लव क्या होता है, ये तो मुझे नहीं पता पर इस बात पर मैं पक्का हूँ कि ये तो नहीं कि कौन बड़ा है, कौन छोटा है, ये तो ‘लव’ नहीं है |

वक्ता : कौन बड़ा और कौन छोटा में अपनी और उसकी तुलना हो रही है ?

श्रोता : अपना और उसका ही हो रहा है कि मेरी ही बात हो रही है न कि मैं बड़ा हूँ | सब घूम फिर के मैं ही बड़ा हो रहा हूँ |

वक्ता : जब तुम ये कहते भी हो कि कोई बड़ा नहीं और कोई छोटा नहीं तो यह घोषणा कौन कर रहा है ?

श्रोता : मैं

वक्ता : तुम्हारा सोचना, तुम्हारा होना तो बना ही हुआ है न ? कल को तुम्हारी सोच बदल गयी तो ? ‘तुम मेरे जीवन में आये और हमने तय किया कि हम बराबर के सहयोगी होंगे | एक साल बाद मैं कहता हूँ कि नहीं हम बराबर के नहीं, ७० -३० के हिस्सेदार होंगे’ और तुम्हारी पार्टनर आएगी और कहेगी कि  तुमने ही कहा था कि हम बराबर के हिस्सेदार होंगे, हम एक दुसरे का सम्मान करेंगे | और अगर मैं यह कहूँ कि  मैंने ही तो बोला था न, मैंने ही बदल दिया | जो बोल सकता है वो बदल भी सकता है, सोच ही तो है। वो आता है न कि सोच कभी भी बदल सकती है। जो सोच है वो तो कभी भी बदल सकती है| तो कभी किसी  की इस बात पर तारीफ मत कर देना कि मुझे उसके विचार बड़े  अच्छे लगते  हैं | विचारों का क्या है, कभी भी बदल जायेंगे, थॉट्स तो कभी भी बदल जायेंगे |

श्रोता : सर तो फिर है क्या? सर मतलब ‘मैं’ है क्या ? ‘आई’ जो आइडेंटिटी है वो थॉट ही तो है और है क्या ? सर तो ऐसे तो हम कुछ भी नहीं हैं | सर अगर मुझे आपको परिभाषित करना है कि आप कैसे आदमी हो तो मैं ये कहूंगा कि वो ऐसा सोचते हैं इसलिए मुझे उनके पास बैठना पसंद है, मैं उनका अनुसरण करता हूँ ।

वक्ता : तुम में से जो भी लोग यहाँ पर बैठ कर मेरी बातें सुन रहे हो, वो कुछ भी नहीं सुन रहे हो और जो लोग कुछ भी नहीं सुन रहे और कुछ भी उनको समझ नहीं आ रहा है, बस चुपचाप बैठ गए हो, बस उन्हें ही समझ आ रहा है। जो भी लोग थोड़े भी एक्टिव हैं, यहाँ बैठ कर कुछ भी कर रहे हैं, मेरी आवाज़ का कुछ भी मतलब ले रहे हैं, उन्हें कुछ भी समझ नहीं आ रहा है।

अद्वैत में मेरे पास ३०-५० लोग होंगे जो महीनों से मेरे साथ हैं, कुछ लोग तो सालो से हैं जिनको मैं ऐसे ही बोलते रहता हूँ जैसे अभी बोल रहा हूँ | ऐसे ही बोलूंगा, कल सुबह भी ऐसे ही बोलूंगा | तो लोग हैं जो सालों से मुझे ऐसे ही सुन भी रहे हैं और उनको कुछ नहीं मिला क्योंकि वो सुन रहे हैं, वो समझदार हैं, वो सुन रहे हैं और कुछ लोग हैं जिनको सब कुछ मिल गया है | ये प्यार है | ये बात बिलकुल बेवकूफी की लगी न, बिल्कुल विरोधाभासी लगी ?

श्रोता : सर समझ ही नहीं आया |

वक्ता : समझ में नहीं आयी न, ऐसे ही जो बिलकुल समझ न आये वो प्यार है | और उसी में सब कुछ समझ में आता है पर वो समझ, सोच नहीं पकड़ पाती इसीलिए सोच कहती है कि तुझे कुछ समझ नहीं आया| बात समझना | सोच और समझ दो बिलकुल अलग-अलग चीज़े हैं | जो भी लोग कहते  हैं कि उनको समझ आ गया उन्हें कुछ समझ नहीं आता | समझ में आ गया होता तो उन्हें पता कैसे चलता?

श्रोता : सर ये बिलकुल बिल्कुल अधूरा सा नहीं लगता जब हमें पता न हो कि वो प्यार है? सर, तो फिर हम कैसे माने कि ये प्यार है या नहीं ?

वक्ता : यही तो प्रॉब्लम है,  तुम्हें प्यार नहीं चाहिए तुम्हें मानना चाहिए |

श्रोता : सर, तो ऐसे तो हम उसको एक आकर्षण मान लें |

वक्ता : तुम्हें जब पता ही नहीं चलेगा तो आकर्षित कैसे हो जाओगी |  कुछ मत मानो, बस ये है ।  तुम कहोगी कि प्यार कुछ हुआ ही नहीं, इतना ही होगा कि मौज बहुत आएगी | जहाँ भी, जैसे भी, जिस हालत में भी एक गहरी कशिश उठती हो, एक अनएक्सप्लेनेबल मौज आती हो, विचार चाहे कुछ भी बोले वहाँ चांस है कि प्यार है |

श्रोता : सर प्यार तो फिर सबसे हो सकता है, है न ?

वक्ता (सिर हिला कर) : और किसी से भी नहीं हो सकता और ये भी हो सकता है कि तुम पाओ कि तुम ऐसी जगह खड़े हो जहाँ पर खुला आसमान है, चारों तरफ मिटटी है, रेत है, कोई बिल्डिंग नहीं है, कुछ भी ऐसा नहीं है जिसे तुम दावा कर सको कि  इस चीज़ से मुझे प्यार है ।

श्रोता : और सर तब भी हो सकता है जब हम बहुत सारे चीज़ों  के  बीच में हो ?

वक्ता : हां बिलकुल हो सकता है पर उन  आइडेन्टिटीस को किनारे रखे हुए हो, बीच में हो, बीच में तो ही रहोगे। अभी भी तो हम सब आइडेन्टिटीस ही तो बैठे  हैं पर वो  आइडेन्टिटीस किनारे बैठी हैं । तो ये भी हो सकता कि कोई न मिले और तुम फालतू ही चिल्ला रहे हो आई लव यू और पीछे से एक छोटा सा चूहा आकर पूछ रहा हैं, ‘यू’ माने  कौन ?

(सब हसतें है)

उसको लग रहा है कहीं मुझे ही बोल रही हो | अकेले यहाँ घूमता रहता हूँ और तुम कहो कि ये तो मुझे भी नहीं पता कि आई लव यू में ‘यू’ कौन है पर है बस ‘आई लव यू’| तो कोई कहे अच्छा आसमान की तरफ मुँह करके बोल रही है, शायद आसमान से कह रही है | तुम कहो नहीं आसमान को नहीं कह रही, अच्छा तो ज़मीन है, ज़मीन को कह रही है, नहीं, ज़मीन को भी नहीं कह रही है | तो किसको बोल रही है ‘आयी लव यू’? ये तो नहीं पता पर आयी लव यू है | किसको बोल रही है ये नहीं पता | अब चूहा भी तिकड़मी है, इंजीनियर होगा |सोचो ज़रा, कोई तो होगा | चूहा लगा है, तुम कह रहे हो कि सोच-सोच के परेशान हो गए, तुम कह रहे हो कि हमें नहीं पता कि ‘यू’ माने कौन पर ‘आई लव यू’ है ये पक्का है | अब चूहा बोल रहा है कि देखो लव माने ये होता है, लव माने वो होता है ऐसा है वैसा है  | इंजीनियर ही नहीं, HIDP भी किये हुए है और आ आकर के बता रहा है कि लव इस नोट दिस एंड लव इस नोट दिस, तुम कह रहे हो, “अरे लव बोलना ही नहीं है, मैं इसको ‘हकूको’ बोलने को तैयार हूँ । ‘लव’ शब्द में भी क्या रखा है, आयी हकूको यू, तब समझना कि प्यार हुआ है | जब प्यार शब्द भी किसी वजन का न रह जाये, तुम कहो हाँ ठीक है | हमें कहना ही नहीं कि मुझे प्यार है |शब्द में क्या रखा है | तुम अगर इतने ही होशियार हो कि हमसे कहने आये हो कि देखो लव तो वही होता है कि  जिसमें ये हो और ये न हो तो हमें तुम्हारी बात ही नहीं माननी | ठीक हमें प्यार नहीं है | हमें ‘हकूको’ है और हम मौज में हैं | तुम प्यार रखो, हमे मौज लेने दो | प्यार शब्द तुमको मुबारक हो हमें तो मौज चाहिए | तुम रखो,  कॉपीराइट है | प्यार हमारा नहीं है, हमें तो मौज मिल रही है | हम खुश हैं और वो मौज तुम हम से छीन नहीं सकते | शब्द छीन लो क्या हो जायेगा | ये ऐसी सी बात है कि तुम खाना खाने बैठे हो और मस्त खाना खा रहे हो और कोई आकर तुमसे मेनू छीन ले जाये वो कह रहा है देखो इसने तो इसमें से तीन डिश मंगाई, मैं तो पूरा मेनू लेकर आ गया, अभी तू खायेगा मेनू को ? खाओ, हमें तो जो चाहिए था हमें मिल गया है, बाकि तुम रखो, क्या करना है |

श्रोता : न तो कारण है और न…

वक्ता : पर मौज बड़ी होती है और मौज भी वैसी नहीं होती जैसी हम जानते हैं| वो मौज ऐसी होती है कि जान निकल जाये | उस मौज को अपनी किसी पुराने मौज से तुलना मत कर लेना कि एक बार शराब पी थी बड़ी मौज आयी थी, वो होता है प्यार,नहीं वो नहीं होता है, या फिर बॉयफ्रेंड के साथ बाइक पर बैठती हूँ पीछे और वो ऐसे भगाता हैं वो तो बड़ी मौज आती है | नहीं ये सब कुछ नहीं, छोड़ो वो मौज ऐसी होती है कि लगता है कि जान निकली, दम घुट गया |

श्रोता : दम कैसे घुट गया ?

वक्ता : ख़त्म

श्रोता : कुछ ऐसे कि जिस तरह का नहीं हो सकता |

वक्ता : बेहोश पर मौज बहुत आ रही हैं | बेहोश होते-होते भी मौज है और लोग आयेंगे और कहेंगे तेरी हालत बड़ी ख़राब है,और मिलाओगे हाँ में हाँ कि यार बड़ी हालत ख़राब है और झूठ नहीं बोल रहे सही में हालत खराब है, पर जब उनसे हाँ में हाँ भी मिला रहे हो, कह रहे हो कि मुझे तो ये चीज़ ही नहीं पसंद है, मेरे को काम ही नहीं करना, मेरे को ये बंदा ही नहीं पसंद है, कहीं न कहीं यह भी पता है कि पसंद तो नहीं फिर भी बड़ा अछा लगता है । करना तो नहीं है पर करे जायेंगे | विचारों का एक एक हिस्सा चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा है कि तुम्हारी वाट लग रही है पर फिर भी कुछ है जो कह रहा है कि लग तो रही है तो क्या होता है, लगने दो वाट ही तो है|

श्रोता : पागलपन नहीं है ये ?

वक्ता : कह  लो ।

श्रोता : हाँ सर कुछ कहते भी है कि प्यार पागलपन है ।

वक्ता : वो इसी लिए है ।

श्रोता : जब ये चीज़ आ जाती है तब इंटेलिजेंस जो आप अभी कह रहे थे…..

वक्ता : तब जगी है। इनटेलीजेन्स शाइन्स रिएली इन लव |प्रेम तुम्हारी दुनिया बर्बाद कर देगा 2

श्रोता : शाइन्स रिएली इन लव ?

वक्ता :  रिएली इन लव |

श्रोता : तो क्या एक इंटेलीजेंट मन अपने आप को इस तरह से बर्बाद होने देगा ? कि वाट लगी हुई है फिर भी मज़े आ रहे हैं |

वक्ता : तुमने पूछा भी तो क्या । इंटेलीजेंट मन होता है क्या ? जब मन बर्बाद हो जाता है तभी तो इंटेलिजेंस जगती है ।

श्रोता : हाय रे छू रहा है अब तो ।

वक्ता : ये मामला ही ऐसा है जो बर्बादी के बाद आबाद होता है इसीलिए तो इतने कम लोगों को प्यार पता चल पाता है | इसीलिए तुम हम ये सेशन कर रहे हैं | नहीं तो क्या ज़रूरत है |

यहाँ पर तो पहले बर्बादी ही होती है, जो बर्बाद होने को तैयार नहीं हैं उसका प्यार से क्या लेना देना, फालतू | तुम जाओ, घर  बसाओ अपना| यहाँ तो बर्बादी पहले ही आयेगी और ऐसे कहोगे, यार बर्बाद हो गया, बड़ा मज़ा आ रहा है और ये नहीं कि झूठ ही झूठ कह रहे हो| सही में बर्बाद ही हो गए, आँखें रो भी रही होंगी कि मेरी आँखों के सामने सब जा रहा हैं और पीछे जाकर थोड़ा हंस कर भी आ जाते होंगे कि मजा बड़ा आ रहा है | तब समझना कि बात बनी| दोनों चीजें एक साथ होंगी खूब जमकर आग भी लगेगी और कही उतनी बारिश भी होगी, तब समझना प्यार है|

अगर सिर्फ कम्फर्ट है, तो प्यार नहीं हैं ये कुछ और ही चल रहा है | जहाँ बहुत सुकून हो, जहाँ बहुत आसान हो मामला, मैं हस्बैंड, तू वाइफ है, मैंने रोज़ घर आना है, तूने रोज़ खाना बनना है, वह प्यार हो ही नहीं सकता | सीधी सी बात है जहाँ इतना कम्फर्ट है वह प्यार कैसे हो गया | प्यार तो है ही तभी जब तलवार चल रही हो । ये कहां से प्यार है, आसान नहीं हो सकता प्यार |

श्रोता : सर अंत तक आसान नहीं होगा ?

वक्ता :  अरे आखिरी दिन तक नहीं |

सत्र देखें : प्रेम तुम्हारी दुनिया बर्बाद कर देगा

लेख १ : वहीँ मिलेगा प्रेम

लेख २ : प्रेम – आत्मा की पुकार

लेख ३ : प्रेम बेगार नहीं है

2 टिप्पणियाँ

    • प्रिय हिमांशु जी,

      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन की ओर से हार्दिक अभिनन्दन! यह चैनल प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित किया जाता है एवं यह उत्तर भी उनकी ओर से आ रहा है | बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहें हैं| फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:

      1. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार: यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है। इस विलक्षण अवसर का लाभ उठाने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91-9818585917

      2: अद्वैत बोध शिविर: प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन द्वारा आयोजित अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अलौकिक अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित ३५+ बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।

      इसके अतिरिक्त, हम बच्चों और माता-पिता के रिश्तों में प्रगाढ़ता लाने हेतु समर्पित बोध-शिविर का आयोजन करते हैं। इन शिविरों का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661

      3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण: आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं। सत्र का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अपार: +91-9818591240

      4. जागृति माह: फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित आधारभूत विषयों पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं। सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917

      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगे।
      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

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