आनंद सफलता की कुंजी है

श्रोता: सर, ऐसा कहा जाता है कि कठिन परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। क्या केवल कठिन परिश्रम ही सफ़लता की कुंजी है?

वक्ता: हिमांशु का सवाल है कि हमें आज तक यही सिखाया गया है कि श्रम सफलता की कुंजी है। हिमांशु जिन्होंने भी ये बोला वो बड़े बेवक़ूफ़ लोग थे। और दुनिया में बेवकूफों की कमी नहीं है । श्रम से कोई कामयाबी नहीं मिलती ।

मैं जब छोटा था, सातवीं-आठवीं में था, तो मैं भी अपनी कॉपी में ये ही लिखता था। बड़ा समय लगा ये समझने में कि कितनी झूठी बात है ये।  एक नया सूत्र देता हूँ, इसको पकड़ लो। समझोगे तो पकड़ ही लोगे। आनंद ही सफलता की कुंजी है। तुम तब तक किसी काम में सफल नहीं हो सकते जब तक तुम उसे करने में आनंद न महसूस करो। जिस काम को करने में तुम्हें गहरा आनंद मिलता है, उसमें सफलता पीछे-पीछे चली ही आएगी। तब तुम्हें श्रम करना नहीं पड़ेगा कि श्रम कर रहे है, अपने  आप हो जाएगा। और तुम कहोगे कि श्रम किया ही नहीं, हम तो खेल रहे थे।

खेलने जाते हो मैदान में, कभी कहते हो कि श्रम किया? और दिन भर कॉलेज में कुछ न कर रहे हो, तो भी बड़ी थकान हो जाती है। करते कुछ नहीं हो मटरगश्ती के अलावा। श्रम किया नहीं जाता। तुमसे ज्यादा परिश्रमी तो ये गधे होते हैं। इनसे ज्यादा श्रम तो तुम कभी नहीं कर पाओगे । उससे ज्यादा श्रम कभी कर पाओगे? नहीं कर पाओगे। तो फिर वो तो बड़ा कामयाब है तुम्हारी नज़रों में। वैसा ही जीवन हो जाए। घूम रहे हैं धूप में, सारी  दुनिया का बोझ हम  उठाते हैं। ये बड़े पागल लोग हैं जिन्होंने इस तरह की बातें कीं हैं कि परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। जिंदगी बोझ नहीं है, जिंदगी अभिशाप नहीं है। जिंदगी इसलिए नहीं है कि गधे की तरह श्रम किया जाए ।gzsgS

जीवन उत्सव है, आनंद है। पर वो तभी है जब उसे पूरे तरीके से जिया जाए, उसमें प्रवेश किया जाए। और उस प्रवेश का ही नाम है ध्यान। पूरे तरीके से होना। जब खेल रहे हो तो पूरे तरीके से खेलो, परिश्रम बिल्कुल नहीं लगेगा। जब पढ़ रहे हो तो किताब से प्रेम ही रहे, श्रम बिल्कुल नहीं लगेगा।फिर रात भर सवाल लगाते रहोगे और पता भी नहीं चलेगा कि सुबह कब हो गयी, और कहोगे कि बड़ा मज़ा आया। परिश्रम नहीं कहोगे। काम तो हो रहा होगा पर तुम्हें लगेगा ही नहीं कि ये श्रम है। ये समझ में आ रही है बात ?

श्रोता: जी सर।

वक्ता: कभी ऐसा अनुभव किया है?

श्रोता: जी सर।

वक्ता: इतना रस आया, इतना आनंद आया कि पता ही नहीं चला कि रात कब बीत गयी। और जिसके साथ ये होने लगे, क्या उसे परीक्षा में प्रथम आने के लिए परिश्रम करना पड़ेगा? जिसे पढ़ाई से प्रेम हो गया, क्या उसे परिश्रम करना पड़ेगा? तुम कविता की बात कर रहे थे, क्या एक कवि परिश्रम करता है कविता लिखने में? ये उसका आनंद होता है। भीतर कुछ है बस, जो बाहर आ जाता है । श्रम करता बहुत है, याद रखना। पर वो श्रम अपने आप हो रहा है। कोई ज़ोर नहीं लगाना पड़ता। आ रही है बात समझ में? और इसका नाम होता है प्रेम। जीवन प्रेम में जीयो। सुन रहे हो? बैठे हुए हो तो परिपूर्ण रहो, इस क्षण से पूरा-पूरा प्रेम रहे। पढ़ रहे हो एक किताब तो एक प्रेमपूर्ण नाता रहे।

जहाँ कहीं भी हो, जीवन में एक शिकायत ना रहे, अपेक्षा न रहे। अपेक्षा में या शिकायत में प्रेम नहीं होता। बस जीवन का संग रहे। जीवन के साथ एक गहरा सम्पर्क रहे। जो भी हो रहा है, बस उस में उपस्थित रहना। हम हैं, जीवन के साथ हैं, कटे – कटे नहीं, जीवन से दूर-दूर नहीं कि मेरे साथ तो बुरा हो गया, मैं रूठा हुआ हूँ जिंदगी से।

रूठा -रूठा जीवन किसी को भी कुछ नहीं देगा। मत करो परिश्रम, अपने आप हो जाएगा।

-‘संवाद’ पर आधारित। स्पष्टता हेतु कुछ अंश प्रक्षिप्त हैं।

संवाद देखें: आनंद सफलता की कुंजी है

इस विषय पर और लेख पढ़ें:

लेख १ : क्यों समझूँ ? क्यों प्रेम जानूँ ?

लेख 2 : दुःख कहाँ है?

लेख ३ : आनंद क्या है? 

2 टिप्पणियाँ

    • प्रिय विपिन जी,

      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन की ओर से हार्दिक अभिनन्दन! यह चैनल प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित किया जाता है एवं यह उत्तर भी उनकी ओर से आ रहा है | बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहें हैं| फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:

      1. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार: यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है। इस विलक्षण अवसर का लाभ उठाने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91-9818585917

      2: अद्वैत बोध शिविर: प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन द्वारा आयोजित अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अलौकिक अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित ३५+ बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।

      इसके अतिरिक्त, हम बच्चों और माता-पिता के रिश्तों में प्रगाढ़ता लाने हेतु समर्पित बोध-शिविर का आयोजन करते हैं। इन शिविरों का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661

      3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण: आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं। सत्र का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अपार: +91-9818591240

      4. जागृति माह: फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित आधारभूत विषयों पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं। सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917

      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगे।
      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

      पसंद करें

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s