अपना क्या मानूँ ?

प्रश्न: सर, अपने कहा कि बाहर से जो कुछ भी मिल रहा है, उसमें और अपनी दृष्टि में भेद करना सीखो। पर सर इतना घुल मिल गए हैं कि पता ही नहीं चलता कि बाहरी क्या है और भीतरी क्या है। पता ही नहीं चलता कि समाज ने क्या दिया है और मेरा अपना क्या है । पता ही नहीं चलता कि क्या है जो मुझे किसी और ने दे दिया और क्या है जो अपने विवेक से आ रहा है ।

वक्ता: कोई दिक्कत ही नहीं है। मान लो कि सब कुछ ही बाहर से आ रहा है। किसी भी चीज़ पर ठप्पा लगाओ ही मत कि ये तो मेरी अपनी है। तुम्हारी अपनी सिर्फ तुम्हारी दृष्टि है जो देख सकती है और उसको साफ़-साफ़ देखो, समझ कर चलो कि मेरी अपनी सिर्फ मेरी चेतना है, बोध है, जो समझ सकती है।lhbhj ‘मैं सब कुछ समझूँगा, मैं किसी भी चीज़ को अपनी समझ से मुक्त नहीं करूँगा’। मैं ये नहीं कह दूँगा कि ये बात तो पिताजी ने कही है तो ठीक ही होगी। ‘मैं उसको भी जानना चाहता हूँ, मैं गौर करना चाहता हूँ। यह नहीं कह दूँगा कि ऐसे तो सब लोग ही कर रहे हैं तो ठीक ही होगा, या ऐसा हमारी किताबों में लिखा है तो ठीक ही होगा। न! हम सब कुछ देखेंगे और पूरे मुक्त भाव से देखेंगे। कोई दबाव अनुभव नहीं करेंगे कि ये तो मान ही लेना चाहिए। न! ‘मुझे सब देखना है, सब समझना है’, फिर जो रहता है अपने साथ वो पक्का होता है। उसी का नाम उत्सव है कि ये मेरा है, उसकी मौज ही अलग है, उसका विश्वास ही अलग है, बहुत मज़ा है उसमें।

फिर डरोगे नहीं, फिर भ्रमित नहीं रहोगे। फिर कोई भी आकर तुम्हें जल्दी से बहला-फुसला नहीं लेगा कि किसी ने कुछ कहा और तुम झंझट में पड़ गए कि क्या पता सही बोल रहा हो। एक बात ये बोल गया, फिर दूसरी बात कोई दूसरा बोल गया, फिर तीसरी बात कोई तीसरा बोल गया और तुम समझ ही नहीं पा रहे हो। तीनों ही बातें ठीक लग रही हैं। जब तीनों बातें ठीक लग रही हों तो कहो, ‘तीनों बाहरी हैं, मैं तीनों को समझूँगा। सिर्फ मेरी समझ मेरी अपनी है। मेरी अपनी दृष्टि, मेरी चेतना मेरी है, बाकी सब कुछ हम देखेंगे’। ठीक है?

– ‘संवाद’ पर आधारित। स्पष्टता हेतु कुछ अंश प्रक्षिप्त हैं।

संवाद देखें: अपना क्या मानूँ ?

इस विषय पर और लेख पढ़ें :

लेख १ : मेरा नहीं, मैं

लेख २ : कैसे जानूँ कि मैं सही हूँ? 

लेख ३ : अवसर अभी है 

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2 टिप्पणियाँ

    • प्रिय हिरल जी,

      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन की ओर से हार्दिक अभिनन्दन! यह चैनल प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित किया जाता है एवं यह उत्तर भी उनकी ओर से आ रहा है | बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहें हैं| फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:

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      3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण: आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं। सत्र का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अपार: +91-9818591240

      4. जागृति माह: फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित आधारभूत विषयों पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं। सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917

      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगे।
      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

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