सुरक्षा नहीं मकान में,लड़की रहो उड़ान में

श्रोता १: सर, आज कल जो परिवारों के मन में डर सा बना हुआ है, हर परिवार में, उस डर को दूर करने के लिए …

वक्ता: क्या हो रहा है आज कल जो ?

श्रोता १: परिवार में जो डर बना हुआ है|

वक्ता: क्या डर है परिवार में?

श्रोता १: गैंग रेप वगैरह हो रहा है इस वजह से| लड़कियां बाहर पढ़तीं हैं, नौकरी करती हैं, तो कोई नाईट ड्यूटी करनी चाहिए या नहीं करनी चाहिए? क्या करना चाहिए?

वक्ता: ठीक है| एक तथ्य है कि समाज में एक तरीके की हिंसा है; तथ्य है | इसको तुम गुब्बारे की तरह फुला नहीं सकते| और जब आदमी तथ्यों को देखे, तो तथ्यों को उनकी पूर्णता में देखना पड़ेगा| ये सच है कि आदमी के मन में विकृतियाँ बढ़ रहीं हैं, पर ऐसा भी नहीं है कि समाज कभी भी बड़ा साफ़ सुथरा रहा हो।

आज तुमको जब चारों तरफ सुनने को मिलता है और पढ़ने को मिलता है कि ऐसी घटना और वैसी घटना, तो ऐसा भी नहीं है कि ये घटनाएं पहले नहीं घटतीं थीं| सच तो ये है कि आज की औरत के हाथ में और ज़्यादा सामर्थ्य है तो इसलिए वो चिल्ला कर बता देती है कि मेरे साथ इस तरह का दुराचार हुआ| पहले तो और ज़्यादा होता था, बता पाने की आवाज़ भी नहीं थी उसके पास| पुलिस में जाकर के एक ऐफ.आई.आर. भी नहीं लिखा सकती थी |
ये हुआ एक तथ्य कि जब कहा जाता है कि घटनाएं बढ़ रहीं हैं, तो घटनाएं बढ़ी तो हैं पर ऐसी कोई बाढ़ नहीं आ गयी है क्योंकि ये धारा हमेशा से बह रही है, ये पहली बात है |

जब तुम कहते हो कि घटनाएँ बढ़ी हैं तो तुम ये कहते हो कि सड़क पर और गली में और मोहल्ले में ये सब घटनाएं हो रहीं हैं| तुम इस तथ्य को भूल जाते हो कि ऐसी घटनाएं तो सबसे ज्यादा घरों के अंदर होती हैं| एक बहुत बड़ा अनुपात है उन लड़कियों का, महिलाओं का जो घर के भीतर ही तमाम तरीके के शोषण और हिंसा का शिकार होती हैं| सम्बन्धी, पिता, भाई, उनकी क्या गिनती है| तो अगर तुमसे कोई कहे कि घर के बाहर मत निकलो, खतरा है| तो उनसे पूछो कि घर के भीतर का क्या करें? घर के भीतर क्या सुरक्षा है? और घर के भीतर सबसे ज्यादा असुरक्षित जानते हो कौन सी लड़कियाँ होती हैं? जो जीवन भर घर के भीतर ही रह गयीं|

जिस लड़की के कदम खुले आकाश में नहीं निकले, जिसने दुनिया नहीं नापी, जिसने अपने हाथ मज़बूत नहीं किये, जो शिक्षित नहीं है, जो कमाती नहीं है, जिसके पास ज्ञान नहीं है, जिसका मन खुला हुआ नहीं है, सबसे ज्यादा संभावना उसी लड़की के शोषण की है| तो अगर शोषण से बचना चाहती हो तो और भी ज़रूरी है कि घर से बाहर निकलो| घर के बाहर खतरा है, निःसंदेह खतरा है, पर घर के भीतर मैं तुमसे कह रहा हूँ और बड़ा खतरा है क्योंकि जो जगा हुआ नहीं है, जो बलहीन है, वो तो कभी भी शिकार हो जाएगा| तुम बात-बात पर यदि निर्भर रहीं, हाथ फैलाती रहीं, ‘पैसे दे दो, कपड़े दे दो, खाना दे दो, घर दे दो, सुरक्षा दे दो’, तुम्हें क्या लगता है जो कोई तुम्हें ये सब देगा, तुमसे इनकी कीमत नहीं वसूलेगा? या मुफ्त में ही मिल जाएगा? मुफ्त में नहीं मिलेगा| कीमत दोगी |

श्रोता २: सर, जो परिवार को डर है, उसको कैसे दूर करें ??

वक्ता: परिवार को भी बताओ ये सब कि आप एक तथ्य तो देखते हो, जो टी.वी में, अखबारों में आ जाता है, पर दूसरे तथ्य की ओर भी तो देखो न| मुझे तो पूरा जीवन जीना है |

सुरक्षा तुम्हें सबसे ज़्यादा पिंजड़ों में मिलती है| पर फिर पिंजड़ों में तुम उड़ भी नहीं सकते|

भूलना नहीं इस बात को| पिंजड़े खूब सुरक्षा देते हैं तुमको, पर वो तुम्हारे पर भी कतर देते हैं| पिंजड़ों में खाना भी मिल जाता है| पिंजड़े की चिड़िया को सुबह-शाम खाना दे दिया जाता है| तो सुरक्षित रहना चाहती हो खूब, तो किसी पिंजड़े में जाकर बैठ जाओ| चाहती हो ऐसा जीवन ??
बाहर खतरा तो है| चिड़िया बाहर उड़ेगी तो बाहर चील है और बाज़ हैं, चिड़िया का शिकार हो सकता है| पर तुम चुन लो कि क्या तुम्हें शिकार होने के डर की वजह से पिंजड़ा ज़्यादा पसंद है?

श्रोता २: नहीं, सर|

-‘संवाद’ पर आधारित। स्पष्टता हेतु कुछ अंश प्रक्षिप्त हैं।

संवाद देखें: सुरक्षा नहीं मकान में,लड़की रहो उड़ान में

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2 टिप्पणियाँ

    • प्रिय चंद्रकांता जी,

      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन की ओर से हार्दिक अभिनन्दन! यह चैनल प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित किया जाता है एवं यह उत्तर भी उनकी ओर से आ रहा है | बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहें हैं| फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:

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      4. जागृति माह: फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित आधारभूत विषयों पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं। सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917

      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगे।
      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

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