डर का मूल कारण

प्रश्न: आपने कहा वर्तमान में जीयो, लेकिन वर्तमान में बहुत सारी ताकतें हैं जिन पर हम निर्भर हैं| वो हमसे कभी ऐसा करने को बोलते हैं, कभी वैसा करने को बोलते हैं| हम उन पर निर्भर हैं, इसलिए हम उनसे डरते हैं| क्या करें?

वक्ता: याद रखना, तुम कभी किसी व्यक्ति से नहीं डरते, कोई व्यक्ति तुम्हें कभी भी डरा नहीं सकता| तुम डरते हो अपनी सुविधाएं छिन जाने से| तुमने एक सौदा कर रखा है कि हमें कुछ चंद छोटी-मोटी सुविधाएं दे दो और उनके लिए हम अपनी स्वतंत्रता तुम्हें दे देते हैं|

यही कारण है कि तुम डरे हुए हो, वरना तुम्हें कोई कैसे डरा सकता है| तुम डरते इसलिए हो क्योंकि तुम्हारे पास जो कुछ है वो किसी और का दिया हुआ है| तुमने व्यापार कर के लिया है, और तुम्हें डर है कि वो तुमसे वापस छीन लेगा|

10996682_589638544503782_1228054240676336759_nतुम्हें अपना नाम किसी और से मिला है, पहचान किसी और से मिली है, सुरक्षा किसी और से मिलती है| तुम्हारी ज़रूरतें कोई और पूरी करता है, तुम्हारे मन को सहारा किसी और से मिलता है| जब तुम इतना कुछ किसी और से लिए जा रहे हो, तो निश्चित सी बात है कि तुम डरोगे कि ये सब कुछ जो ये हमें दे रहा है, कहीं ये हमसे वापस ना ले ले|

अगर तुमने इतना कुछ न ले रखा होता तो तुम इतना डरते नहीं| पर तुम्हारी ज़िन्दगी में तुम्हारा अपना कुछ है ही नहीं| ज़िन्दगी भरी हुई है उधार की चीज़ों से, जो तुमने किसी और से ले रखी हैं| अब तो डरोगे ही, अब वो तुम्हारा मालिक बनेगा ही| जिस से लिया है ये सब कुछ, वो मालिक बन गया तुम्हारा|

अब डरोगे! वो कहेगा कि इतना कुछ दिया है, मैं वसूलूँगा भी तो| और जितना ज़्यादा किसी से लेते जाओगे, उतना गहरे तरीके से उसके सेवक बनते जाओगे, क्योंकि वो वसूलेगा| सौदा होगा! और ये सब लेने के चक्कर में तुम्हें अपनी स्वतंत्रता देनी पड़ेगी| अब क्यों रोते हो, ‘दूसरों की आज्ञा माननी पड़ती है, दूसरों के इशारों पर चलना पड़ता है’? इस स्थिति के ज़िम्मेदार तुम ख़ुद हो|

इतना घटिया सौदा तुमने किया क्यों? और क्यों करते जाते हो रोज़ाना? ये सौदा तुम रोज़ कर रहे हो| क्यों कर रहे हो?

-‘संवाद’ पर आधारित| स्पष्टता हेतु कुछ अंश प्रक्षिप्त हैं|

इस विषय पर और पढ़ें:

लेख १                       लेख २                 लेख ३ 

संवाद देखें: https://www.youtube.com/watch? v=8g9_-1pvgBQ

3 टिप्पणियाँ

  1. What causes fear, and why does the brain stop thinking when afraid?

    Dear, Fear is not in act, fear is in thought. Secondly, fear is the thought of others. Thirdly, fear is the thought that says that the others can take away something from me. Abhishek, what was he afraid of taken away? His image, his respectability. He…

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    • प्रिय विपुल जी,

      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन की ओर से हार्दिक अभिनन्दन! यह चैनल प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित किया जाता है एवं यह उत्तर भी उनकी ओर से आ रहा है | बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहें हैं| फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:

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      इसके अतिरिक्त, हम बच्चों और माता-पिता के रिश्तों में प्रगाढ़ता लाने हेतु समर्पित बोध-शिविर का आयोजन करते हैं। इन शिविरों का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661

      3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण: आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं। सत्र का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अपार: +91-9818591240

      4. जागृति माह: फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित आधारभूत विषयों पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं। सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917

      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगे।
      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

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