मैं आपसे ही खुल कर बात क्यों कर पाता हूँ?

प्रश्न: सर, एक प्रश्न है निजी जीवन से, जैसे की यहाँ पर होते हैं तो यहाँ पर कुछ भी पूछने में परेशानी नहीं लगती। पर जैसे मैं अभी कहीं यात्रा पर गया था, तो वहाँ जो प्रेरणास्रोत थे, उनसे कुछ भी पूछने में अजीब लगता था। डर लगता था। पर यहाँ पर जब भी प्रश्न आता है तो एकदम पूछ लेता हूँ। ऐसा सर, यहाँ और वहाँ अलग क्यों था? 

आचार्य प्रशांत: आप गए हैं, मान लीजिये किसी ऐसे राजनीतिक नेता की सभा में, जो इस बात के लिए प्रसिद्ध है कि लड़ो, जूझो, इस पर आक्रमण कर दो, उसको मार दो। और वो इसी कारण प्रेरणास्रोत है क्योंकि उसने अपनी ये विशिष्ट विशेषता बना रखीं हैं। इसी कारण वो प्रेरणास्रोत है। आप उससे कैसे पूछ पाओगे कि थोड़ा शान्ति के बारे में बताइए न, सहजता क्या होती है, आप यह बात ही नहीं कर पाओगे। क्योंकि वहाँ, उसके चारों ओर उसके होने से जो पूरा माहोल है, वो उस प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व से ही निकल रहा है। आप किसी बिजनेस टाइकून से मिल रहे हो, आप उससे कैसे पूछ पाओगे कि अपरिग्रह क्या होता है? त्याग क्या होता है? आपको उससे वही सवाल पूछने पड़ेंगे, जैसा उसका व्यक्तित्व है। अब आपका सवाल उसके व्यक्तित्व को देख कर तो नहीं आ रहा। पर पूछने पर पाबन्दी है। पूछ तो वही सकते हो न जैसा उसका व्यक्तित्व है। और हर प्रेरणास्रोत के साथ यही भीषण समस्या है, वो व्यक्तित्व लेकर घूमता है। वो कहता है कि एक तरीके का रास्ता है। उसी पर आप मिल रहे हो। एक प्रेरणास्रोत है।

मिस यूनीवर्स है, अब आप उससे कैसे पूछ पाओगे कि शरीर मिथ्या है कि नहीं है? बड़ी दिक्कत है न। अब जा रहे हो आप, सशस्त्र बलों के मुखिया से मिल रहे हो, और वो संवाद ही इस बात पर दे रहा है कि हमने फलानी लड़ाई में किस तरह से दुश्मनों का संघार किया था। आप उससे कैसे पूछ पाओगे कि अहिंसा क्या परम धर्म है या नहीं है?

आपको पता है कि यहाँ पर तो हिंसा की ही वकालत हो रही है, तो सवाल घुट जाएगा। सवाल को उसके व्यक्तित्व के अनुरूप होना पड़ेगा, और फ़िर कोई सवाल है ही नहीं। जब आपको सवाल पूछना ही है जो उसके व्यक्तित्व से मेल खाता हो, तो फ़िर सवाल क्या पूछा? फ़िर तो आपने उसका बस समर्थन किया। सवाल नहीं पूछा। और हर प्रेरणास्रोत यही चाहता है कि उससे सवाल ही ऐसे पूछे जायें जिससे उसका व्यक्तित्व चमके। उसके व्यक्तित्व पर आंच आती हो, ऐसा सवाल आप नहीं पूछ पाएँगे। कभी किसी शिक्षक से, उदाहरण दे रहा हूँ, ऐसा सवाल नहीं पूछ पाएँगे जो उसके विषय से बाहर का हो। पूछ पाओगे?

आप सचिन तेंडुलकर से मिलने गए हो, आप उससे कोई बड़ा बौद्धिक सवाल नहीं पूछ सकते। दिक्कत हो जाएगी। आप ये पूछ लो कि “आप ख़ुद को कैसे प्रोत्साहित रखते हैं?” “क्या आप सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं क्रिकेट में या कोई और?”, और आपने कोई बड़े बोध-पूर्ण सवाल पूछ लिए, तो उसका भी अपमान होगा और आपका भी हो जाएगा। आपको सवाल वही पूछना पड़ेगा जिसमें वो और निखर कर सामने आये।


‘शब्द-योग’ सत्र पर आधारित। स्पष्टता हेतु कुछ अंश प्रक्षिप्त हैं।

सत्र देखें: आचार्य प्रशांत: मैं आपसे ही खुल कर बात क्यों कर पाता हूँ?

इस विषय पर और लेख पढ़ें:

लेख १: आचार्य प्रशांत, गुरु नानक पर: खोजना है खोना, ठहरना है पाना

लेख २: आचार्य प्रशांत, गुरु नानक पर: हमारा जीवन मात्र वृत्तियों की अभिव्यक्ति

लेख ३: गुरु वचन – अहंकार नाशी 

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2 टिप्पणियाँ

    • कृपया इस उत्तर को ध्यान से पढ़ें | आचार्य जी से जुड़ने के निम्नलिखित माध्यम हैं:

      १: आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
      यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से रूबरू होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
      इस अद्भुत अवसर का लाभ उठाने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91-9818585917

      २: अद्वैत बोध शिविर:
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन द्वारा आयोजित अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर हैं। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग अपने जीवन से चार दिन निकालकर प्रकृति की गोद में शास्त्रों का अध्ययन करते हैं, मुक्त होकर घूमते हैं, खेलते हैं, और आचार्य जी से प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिकता अपने जीवन में देखते हैं। ऋषिकेश,शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, रानीखेत, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नयनाभिराम स्थानों पर आयोजित पचासों बोध शिविरों में हज़ारों लोग कृतार्थ हुए हैं।
      इसके अतिरिक्त, हम बच्चों और माता-पिता के रिश्तों में प्रगाढ़ता लाने हेतु एक अभिभावक-बालक बोध शिविर का आयोजन भी करते हैं।
      शिविरों का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661

      ३. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण:
      आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
      सत्र का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अपार: +91-9818591240

      ४. जागृति माह:
      फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
      सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917

      ५.पार से उपहार:
      प्रशांत-अद्वैत फाउंडेशन की ओर से आयोजित किया जाने वाला यह मासिक कार्यक्रम जन सामान्य को एक अनोखा अवसर देता है, गुरु की जीवनशैली को देख लाभान्वित होने का। चंद सौभाग्यशालियों को आचार्य जी के साथ शनिवार और इतवार का पूरा दिन बिताने का मौका मिलता है। न सिर्फ़ ग्रंथों का अध्ययन, अपितु विषय-चर्चा, भ्रमण, गायन, व ध्यान के अनूठे तरीकों से जीवन में शान्ति व सहजता लाने का अनुपम अवसर ।
      स्थान: अद्वैत बोधस्थल, ग्रेटर नॉएडा
      भागीदारी हेतु ई-मेल करें: requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: सुश्री अनु बत्रा: +91-9555554772

      ६. त्रियोग:
      त्रियोग तीन योग विधियों का एक अनूठा संगम है | रोज़ सुबह दो घंटे तीन योगों का लाभ: हठ योग, भक्ति योग एवं ज्ञान योग | आचार्य जी द्वारा प्रेरित तीन विधियों का यह मेल पूरे दिन को, और फिर पूरे जीवन को निर्मल निश्चिन्त रखता है |
      आवेदन हेतु ईमेल करे: requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री कुंदन सिंह: +91-9999102998
      स्थान: अद्वैत बोधस्थल, ग्रेटर नोएडा

      यह चैनल प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित किया जाता है एवं यह उत्तर भी उन्हीं से आ रहा है |

      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

      Like

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