गहरी वृत्ति को जानना ही है त्याग

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मन मते माया तजि, यूँ करे निकस बहार।

लागी रही जानी नहीं, भटकी भयो खुआर।।

संत कबीर 

आचार्य प्रशांत: मन ने बड़ी होशियारी दिखाई, मन ने कहा माया तज दो, माया के नाम पर क्या तज दिया?

माया के नाम पर लोग क्या तजते हैं? ये खाऊंगा नहीं, ये पहनूंगा नहीं, रुपया पैसा त्याग दिया। धन, पद, स्त्री, यही सब है माया, त्याग दो!

“मन मते माया तजि, यूँ करे निकस बहार” 

बहुत सारी चीज़ों से अपनेआप को वर्जित कर लिया, ऐसे कर के निकल आये बाहर माया के फंदे से। अपनेआप को कई दायरों से बाहर खड़ा कर लिया। और मन ने सोचा ये सब त्याग कर देने से तुम्हारा काम हो जायेगा। कबीर कह रहे हैं, “लागी रही जानी नहीं, भटकी भयो खुआर” – जो तुम्हें वास्तव में लगी हुई है, जो तुम्हारी गहरी से गहरी वृत्ति है, उसको तुमने जाना नहीं, तो फ़िर भटकते रहोगे खुमार में। नशे में बेवकूफों की तरह भटकते रहोगे।

सौ त्याग कर लोगे, माया को कितना भी तज लोगे, माया माने बाहरी माया, ये त्यागा वो त्यागा, पर जब तक मन में जो ग्रंथियां हैं उनको जाना नहीं, त्यागा नहीं, तो बस नशे में भटकते ही रहोगे। बाहरी त्याग से कुछ नहीं होगा, वो आडम्बर बन जाएगा। जो ‘लागी’ हुई है उसको जानो, बाहर-बाहर के खेल से कुछ नहीं होगा।

उस ‘लागी’ को तुम राम बोलो, या अपना भय बोलो, दोनों को जानना ज़रूरी है। एक ही हैं । क्या ‘लागी’ हुई  है, उसको जानिये।


‘शब्द-योग’ सत्र पर आधारित। स्पष्टता हेतु कुछ अंश प्रक्षिप्त हैं।

सत्र देखें: आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर: गहरी वृत्ति को जानना ही है त्याग (Real renunciation)

इस विषय पर और लेख पढ़ें:

लेख १: आचार्य प्रशांत, गुरु नानक पर: हमारा जीवन मात्र वृत्तियों की अभिव्यक्ति (Life is desires manifested)

लेख २: आचार्य प्रशांत: वृत्तियों का बहाव

लेख ३: Acharya Prashant: विचार और वृत्तियाँ ही हैं मन (Mind is nothing but thoughts and tendencies)


सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न:  http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट:  https://goo.gl/fS0zHf

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2 टिप्पणियाँ

    • कृपया इस उत्तर को ध्यान से पढ़ें | आचार्य जी से जुड़ने के निम्नलिखित माध्यम हैं:

      १: आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
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      इस अद्भुत अवसर का लाभ उठाने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91-9818585917

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      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन द्वारा आयोजित अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर हैं। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग अपने जीवन से चार दिन निकालकर प्रकृति की गोद में शास्त्रों का अध्ययन करते हैं, मुक्त होकर घूमते हैं, खेलते हैं, और आचार्य जी से प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिकता अपने जीवन में देखते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, रानीखेत, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नयनाभिराम स्थानों पर आयोजित पचासों बोध शिविरों में हज़ारों लोग कृतार्थ हुए हैं।
      इसके अतिरिक्त, हम बच्चों और माता-पिता के रिश्तों में प्रगाढ़ता लाने हेतु एक अभिभावक-बालक बोध शिविर का आयोजन भी करते हैं।
      शिविरों का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661

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      आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
      सत्र का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अपार: +91-9818591240

      ४. जागृति माह:
      फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
      सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917

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      प्रशांत-अद्वैत फाउंडेशन की ओर से आयोजित किया जाने वाला यह मासिक कार्यक्रम जन सामान्य को एक अनोखा अवसर देता है, गुरु की जीवनशैली को देख लाभान्वित होने का। चंद सौभाग्यशालियों को आचार्य जी के साथ शनिवार और इतवार का पूरा दिन बिताने का मौका मिलता है। न सिर्फ़ ग्रंथों का अध्ययन, अपितु विषय-चर्चा, भ्रमण, गायन, व ध्यान के अनूठे तरीकों से जीवन में शान्ति व सहजता लाने का अनुपम अवसर ।
      स्थान: अद्वैत बोधस्थल, ग्रेटर नॉएडा
      भागीदारी हेतु ई-मेल करें: requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: सुश्री अनु बत्रा: +91-9555554772

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      स्थान: अद्वैत बोधस्थल, ग्रेटर नोएडा

      यह चैनल प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित किया जाता है एवं यह उत्तर भी उन्हीं से आ रहा है |

      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

      Like

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