सत्य वो, जिसकी मौत न हो

तो सत्य वो, जो ऊँचे से ऊँचा, सुन्दर से सुन्दर, खरे से खरा, और असली से असली है इसलिए सच सिर्फ़ उसको माना गया है।

जो धोखा नहीं दे देगा, जो पलक झपकते गायब नहीं हो जाएगा और पलक झपकाने की अवधि कुछ भी हो सकती है, हो सकता है कि सहस्त्रों, वर्षों उसे पलक झपकने में लगते हों। निर्भर करता है, किसकी पलक है! तो जो पलक झपकते गायब हो जाए, जो आज है कल नहीं, उसे तुम सच मानते हो क्या? अपने आम अनुभवों से भी बताओ? उसको तो तुम यही कहते हो कि भ्रम था, धोखा था।

हमें लगा और फिर देखा, तो पाया नहीं। भासित हुआ और उस पर यकीन किया, तो धोखा खाया। कुछ यदि ऐसा है, तो उसे सच कहोगे? तो इसलिए समय में जो कुछ है, उसे सत्य नहीं माना गया है। इसलिए संसार, समय दोनों सत्य की छाया माने गए, सत्य का फैलाव माने गए पर प्रत्यक्ष रूप से उन्हें सत्य का दर्ज़ा नहीं दिया गया।


पूरा लेख पढ़ें: https://tinyurl.com/zryyqnf

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