जो भरम उसे भरम, जो परम उसे परम

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जो भरम उसे भरम, जो परम उसे परम

छोटी सी बात, छोटा सा मरहम

~ आचार्य प्रशांत

वक्ता: भगवद्गीता का है, चौथे अध्याय का ग्यारवाँ श्लोक:

‘’जो मुझे जिस रूप में भजता है, मैं भी उसे उस ही रूप में भजता हूँ।’’

इसका अर्थ ये हुआ कि

जीवन में जो तुम्हें मिल रहा है, वो ठीक वैसा ही है जैसी तुम्हारी पात्रता है।

जीवन अगर तुम्हें लगता है कि कहीं तुम्हारा असम्मान कर रहा है, तो निश्चित रूप से कहीं न कहीं तुमने सत्य का असम्मान करा है। जिसे सत्य दिखाई देता है, उसे सत्य मिलेगा और जिसे लगता है कि भरम है, उसे भरम ही मिलेगा। जैसे अभी हो रहा होगा जिसे सत्य दिख रहा है, उसे सत्य मिलेगा; जिसे भरम दिख रहा है उसे भरम मिलेगा। उसी को लेकर अंग्रेजी में छोटा सा बोला है कि: वाट यू गेट, इज़ वाट यू आर  या वाट यू आर इज़ वाट यू गेट।

जो तुम्हारी जीवन के विषय में धारणा है, जीवन ठीक उसी रूप में तुम्हारे सामने आएगा। जीवन बदलना चाहते हो, तो धारणाएँ बदल दो, और अगर जीवन के पार जाना चाहते हो तो धारणाओं के पार चले जाओ। आप सत्य को भी अगर भ्रम ही माने रहोगे, तो जीवन भी पूरे तरीके से भ्रमयुक्त होकर ही मिलेगा। और अगर भ्रम में भी यदि सत्य को देखोगे, तो सत्य ही सत्य चमकेगा। ये तुम पर है। कृष्ण कहते हैं कि, ‘’मैं तुम पर कोई विवशता लादता ही नहीं। तुम पूरे तरीके से मुक्त हो, बस मैं तुमसे ये कह रहा हूँ कि बाज़ी तुम्हारे हाथ में है।’’

तुम कृष्ण को हाँ बोलो, कृष्ण तुम्हें हाँ बोल देंगे।

तुम कृष्ण को न बोलो, कृष्ण तुम्हें न बोल देंगे। जो मुझे ‘’जो मुझे किस रूप में भजता है, मैं भी उसे उस ही रूप में भजता हूँ। तुम मुझे हाँ बोलो, मैं भी तुम्हें हाँ बोल दूँगा।’’ मालिक तुम हो। मालिक ने मालकियत तुम्हें सौंप दी है। तो अगर तुम पाते हो कि तुम्हारे जीवन में कृष्णत्व का अभाव है, तो समझ लेना कि तुमने पहले ही कृष्ण को न बोली होगी। जो परम, उसे परम’ – जिसने परम को हाँ बोल दिया, उसे परम न मिले ऐसा हो नहीं सकता और तुम्हें अगर नहीं मिल रहा, तो किसी और को दोष मत देना, तुमने ही न बोल रखा है। ये अब तुम खोजो कि तुमने कैसे न बोला, किसी और को दोष मत देना। तुम्हीं न बोले जा रहे हो, इसिलिए तुम्हें मिलता नहीं।

कृष्णत्व का मतलब समझते हो? कृष्णत्व का मतलब वो सब कुछ, जो प्यारा है। कृष्ण माने जो प्यारा है, जो खींचता है अपनी ओर, जो मोहित करता है। क्या प्यारा है? प्यार प्यारा है, शांति प्यारी है, खूबसूरती प्यारी है। ये सब न हो अगर जीवन में, अगर खूबसूरती न हो, लावण्य न हो, प्रेम न हो, मीठापन न हो, उड़ान न हो, संतुष्टि न हो, तो समझ लेना कि तुमने ही दरवाज़े बंद किए हैं। तुमने न बंद किए होते, तो फिर तो जो परम उसे परम

जो अपनेआप को छोटा मान रहा है, उसे ही बस जीवन में वो मिलेगा, जो छोटा है। अब क्यूँ शिकायत करते हो कि जीवन में कभी कुछ महत और हसीन मिला नहीं? तुमने ही अपनेआप को छोटा बनाया था। तुमने ही अपनेआप को छोटा बनाया था, तुमने ही दरवाज़े बंद करे हैं, तो अब देखो कि तुम किन-किन तरीकों से न बोल रहे हो। खुद न बोलते हो, खुद दरवाज़ा नहीं खोलते, इल्ज़ाम उस पर लगाते हो कि आता नहीं। वो खटखटाए जाए, तुम खोलो नहीं, इल्ज़ाम फिर भी उस पर है।


 सत्र देखें: आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर: जो भरम उसे भरम, जो परम उसे परम


आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम:

  • अद्वैत बोध शिविर

हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा:  +91 – 8376055661

  •   आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण (कोर्स)

आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com  या

 संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

  •    जागृति माह

    जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर।            जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का            हिस्सा बन सकते हैं।

    आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

     सम्पर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

  •  आचार्य जी से निजी साक्षात्कार

आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

  संपर्क करें:  सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917


  सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न:  http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट:  
https://goo.gl/fS0zHf

 

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2 टिप्पणियाँ

  1. मेरे साथ हमेशा यह परेशानी रही थी कि मुझे लगता था कि मेरे साथ ही कुछ ख़ास गलत हो रहा है। दुनिय अको देखता था तो लगता था कि हाँ कुछ बेहतर हालत है मेरी परयः चक्र चलत अहि रहता था हमेशा । आज शायद यह समाप्त हो गया

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    • प्रिय —— जी,

      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन की ओर से हार्दिक अभिनन्दन!

      यह चैनल प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित किया जाता है एवं यह उत्तर भी उनकी ओर से आ रहा है |

      बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहें हैं|

      फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:
      _______________________________________________

      1. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
      यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।

      इस विलक्षण अवसर का लाभ उठाने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com
      या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91-9818585917

      2: अद्वैत बोध शिविर:
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन द्वारा आयोजित अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अलौकिक अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित ३५+ बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
      इसके अतिरिक्त, हम बच्चों और माता-पिता के रिश्तों में प्रगाढ़ता लाने हेतु समर्पित बोध-शिविर का आयोजन करते हैं।

      इन शिविरों का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com
      या संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661

      3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण:
      आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।

      सत्र का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com
      या संपर्क करें: श्री अपार: +91-9818591240

      4. जागृति माह:
      फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित आधारभूत विषयों पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।

      सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर
      या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917
      _______________________________________________

      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगे।

      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

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