संवेदनशीलता क्या है?

 

New Microsoft Office PowerPoint Presentation (2)कबीर क्षुधा कूकरी, करे भजन में भंग

वाकूं टुकड़ा डारि के, सुमिरन करूँ सुरंग

~ संत कबीर

प्रश्न: मैं खा रहा हूँ या शरीर अपना काम कर रहा है?

वक्ता: संवेदनशीलता का अर्थ ही यह है कि मैंबीच में न आए। जहाँ मैंबीच में आ जाता है, वहाँ संवेदनशीलता नष्ट हो जाती है। ये सवाल कि यदि सिर्फ़ शरीर हो तो वो क्या करेगा? मैं माँग रहा हूँ या वाकई शरीर की प्रक्रिया है? और शरीर की जो प्रक्रिया होती है, उसमें इकट्ठा करने जैसा होता नहीं कुछ विशेष। शरीर जानता है उसे कितना चाहिए। भोग का जो भी लक्ष्य है, जिस भी चीज़ का भोग कर रहे हो, उसमें सवाल एक ही पूछने वाला है: ‘’मैं यदि न सोचूँ भोग के बारे में तो भी क्या भोग की आवश्यक्ता रहेगी?’’

उदाहरण देता हूँ: तुम न सोचो कि साँस लेनी है, पर फिर भी साँस लेने की ज़रूरत रहेगी। पर तुम्हारे सामने दस तरीके के पकवान रखे हैं, और तुम एक बार सोचो कि तुम्हें ये खाने की ज़रूरत नहीं है, तुम्हें खाने की ज़रूरत नहीं रहेगी। अभी निर्विचार पर बड़ा मज़ेदार प्रयोग हुआ। तैरने जाता हूँ, तो पहले तो जो वहाँ दीवार है, उसको पकड़ के ही पाँव चला रहा था। कहा गया छोड़ दो, नहीं छोड़ा। दूसरे दिन भी आधे समय तक पकड़े ही था। उसमें कुछ तरकीबें लगाईं, कुछ जुगाड़ लगे, वो सब लगा चुकने के बाद भी शरीर कुछ अभ्यस्त था पाँव पर खड़ा होने का कि उसको छोड़ते ही तुरंत पाँव पर आ जाता था। तैरता नहीं थाफ्लोट  नहीं करता था।

एक छोटा सा काम किया कि क्या सोचने की ज़रूरत है, तो बिलकुल माहौल बदल गया। अचानक से तैर गया। ये (एक श्रोता को इंगित करते हुए) छोड़ कर गया था, दीवार पकड़ा हुआ और वापिस आया तो मैं तैर रहा था। अब ये बोलता है कि सर बहुत तेज़ी से सीख लिया आपने, चार दिन में लोग इतनी तेज़ी से सीखते नहीं। वो कुछ नहीं था बस इतना ही था कि इस मौके पर मेरी ज़रूरत है क्या? क्यूँकी वो बार-बार यही कहता रहता था कि फ्लोटिंग  में जितना छोड़ दो, उतना तैरते रहोगे। तो बस इस सवाल से सारा काम हो गया कि, ‘’मेरी ज़रूरत है क्या? नहीं है तो बस शांत रहो।’’ तो क्यों उसमें कोशिश करनी है कुछ और सतर्कता कीडिफेन्स की।

पहले तो मैंने यहाँ तक योजना बनाई कि पहले तो मैं ये तैयार करता हूँ कि डूबने से बचना कैसे है, फिर बचेंगे। तो मैंने कई बार ये कोशिश की कि जब डूबने लगूंगा तो खड़ा कैसे होना है ये कर लेते हैं। चार फीट पानी में! वो सब कुछ नहीं आया काम, अंत में बस यही काम आ गया कि, ‘’मेरी ज़रूरत है क्या?’’ और अगर मैं हट जाऊं तो भी क्या खानेपीने की ज़रूरत रहेगी? आपके हटने पर भी जो हो जाए, उसे होने दीजिये। पर उसके लिए बड़ा साहस चाहिए। अब आप किसी के समीप बैठे हो, प्रेम का क्षण है तो आप तो प्रेम करना चाहते हो न? अब इस वक़्त ये बड़ी ऊबाऊ बात लगेगी कि तुम हट जाओ। अरे! हम ही हट गए अगर तो फिर मज़े कौन लेगा?

आप देख रहे हैं यहाँ पर फँस कहाँ रहा है मामला? मज़ा आता ही तब है, जब तुम हट जाओ। तब मन क्या कहता है कि, ‘’हम हट गए, तो हमें ही तो मज़े लेने थे, अब मज़े कौन लेगा?‘’ जिस टुकड़े की बात कर रहे हैं कबीर, ‘’वाकूं टुकड़ा डारि के, सुमिरन करूँ सुरंग,’’ वो वही है। क्षुधा को टुकड़ा डालना बिलकुल वही प्रक्रिया है, जो सुमिरन की होती है। अपनेआप को हटाना, एक ही बात है। शरीर को टुकड़ा डालना बिलकुल वही प्रक्रिया है, — बस कहीं और से देखी जा रही है जो सत्संग की होती है। अपनेआप को हटाना। हाँ, क्षुधा को भोगना बिलकुल दूसरी चीज़ है।

संवेदनशीलता का अर्थ ही यही है कि जो मन की स्थूल, ज़ोर की आवाजें है, उनको ज़रा चुप रहने को बोल देना ताकि सूक्ष्म सुनाई दे सके।

संवेदनशीलता का अर्थ ही यही होता है: सूक्ष्म आवाजें सुन पाना।

आप बोलोगे कि ये रिकॉर्डर संवेदनशील है? जब वो हल्की से हल्की आवाज़ को भी सुन ले। और सूक्ष्मतम आवाज़ को तब सुन पाएगा न जब भारी, स्थूल आवाजों से उसको मुक्ति मिले। वो कर्कश आवाज़, अहंकार की आवाज़ है। ज्यों ही वो नहीं रहती, वहीं आपको सूक्ष्म आवाजें सुनाई देने लग जाती हैं। आप जान जाते हो कब पानी पीना है, कब खाना खाना है। बिना अहंकार के बताए भी आप सब जान जाते हो। सच तो यह है कि आप नहीं जान जाते, प्रक्रिया अपनेआप घट जाती है बिना आपके जाने। जैसे साँस अपनेआप हो जाती है बिना आपके जाने। प्रक्रिया अपनेआप हो जाएगी, आपको उसमें दखल देने की ज़रूरत है नहीं।


सत्र देखें: आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर: संवेदनशीलता क्या है? (What is sensitivity?)


आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम:

  • अद्वैत बोध शिविर

हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा:  +91 – 8376055661

  •   आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण (कोर्स)

आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com  या

 संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

  •    जागृति माह

    जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर।      जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का            हिस्सा बन सकते हैं।

    आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

     सम्पर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

  •  आचार्य जी से निजी साक्षात्कार

आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

  संपर्क करें:  सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917


  सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न:  http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: 
 https://goo.gl/fS0zHf

 

 

Advertisements

2 टिप्पणियाँ

    • नमस्कार,

      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन की ओर से हार्दिक अभिनन्दन!

      यह चैनल प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित किया जाता है एवं यह उत्तर भी उनकी ओर से आ रहा है |

      बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहें हैं|

      फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:
      _______________________________________________

      1. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
      यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।

      इस विलक्षण अवसर का लाभ उठाने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com
      या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91-9818585917

      2: अद्वैत बोध शिविर:
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन द्वारा आयोजित अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अलौकिक अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित ३५+ बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
      इसके अतिरिक्त, हम बच्चों और माता-पिता के रिश्तों में प्रगाढ़ता लाने हेतु समर्पित बोध-शिविर का आयोजन करते हैं।

      इन शिविरों का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com
      या संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661

      3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण:
      आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।

      सत्र का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com
      या संपर्क करें: श्री अपार: +91-9818591240

      4. जागृति माह:
      फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित आधारभूत विषयों पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।

      सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर
      या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917
      _______________________________________________

      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगे।

      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

      Like

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s