जो समय में है वो समय बर्बाद कर रहा है

 

New Microsoft Office PowerPoint Presentation (2)वक्ता: पहली बात तो ये कि समय को नहीं मैनेज किया जा सकता। ध्यान से समझिएगा इस बात को। समय का अर्थ है एक प्राकृतिक परिवर्तन जो हो ही रहा है। उसको कोई नहीं मैनेज कर सकता। होना उसका स्वभाव है, वो होगा। हाँ, एक एंटिटी है, जिसको मैनेज किया जा सकता है यदि उसे समझा जाए तो। और समझना ही मैनेज करना है। समझने और मैनेज करने में कोई ख़ास अंतर नहीं है। एक बार समझ लिया तो मैनेज  हो जाएगा। या इसको ऐसे कह लेते हैं कि एक बार समझ लिया तो फिर मैनेज करने की कोई ज़रूरत ही नहीं है।

समझना ही मैनेज करना है। एक बार समझ लिया तो फिर अब मैनेज नहीं करना है। क्यों कहते हो कि, ‘’मुझे टाइम मैनेज करना है?’’ तुम कहते इसीलिए हो क्योंकि पाते हो कि दिन निकल गया, कुछ सार्थक हुआ नहीं। जब वक़्त ख़राब हो रहा था, तो क्या उस वक़्त जानते थे कि, ‘’मैं वक़्त ख़राब कर रहा हूँ?’’ ठीक उस वक़्त, उसके आगे पीछे नहीं। क्या ठीक उस वक़्त जानते थे कि ये वक़्त खराब करना है? तुम तो बाद में जानते हो। बाद में जानना सिर्फ़ एक कल्पना है, विचार है। वो उस वक़्त का जानना तो नहीं है न। उस वक़्त का जानना तो नहीं है न कि, ‘’मैं टाइम ख़राब कर रहा हूँ।‘’

ये मत सोचिए कि समय बर्बाद हो रहा है। उस एंटिटी के बारे में सोचिए, उस युनिट के बारे में जो समय बर्बाद कर रहा है। कौन समय बर्बाद कर रहा है? आपका मन समय बर्बाद कर रहा है। इसको समझिएगा और अगर ज़रूरत पड़े तो याद कर लीजिएगा। मन खुद ही समय है। जब तक मन की गतिविधि रहेगी, तब तक समय निरंतर चलता रहेगा। एक समय होता है, जिसे हम क्रोनोलॉजिकल टाइम कहते हैं, जो घड़ी दिखाती है। वो अपनी गति से चलता रहता है। तुम कहते हो न कि टाइम ख़राब हो गया, वो मनोवैज्ञानिक समय है। क्रोनोलॉजिकल टाइम किसी पर निर्भर नहीं करता। वो इस दुनिया की प्रकृति है। मनोवैज्ञानिक समय वो है जिसे तुम बर्बाद करते हो। कैसे बर्बाद करते हो? समय में रह कर।

 ध्यान देंगें तो ही समझ में आएगा, बात गहरी है।

समय कैसे बर्बाद होता है? समय ऐसे ही बर्बाद होता है क्यूँकी हम समय में यात्रा कर रहे होते हैं। समय में हम कैसे यात्रा कर रहे होते हैं? आप सब यहाँ बैठे हैं। पर आप में से बहुत सारे लोग हैं, जो समय में यात्रा करके पौने पाँच बजे पहुँच चुके हैं। कि पौने पाँच बज चुका है, और मैं इस कमर से बाहर हूँ, और मुझे जो-जो करना होता है, वो मैं कर रहा हूँ। आप में से बहुत सारे लोग हैं, जो समय में यात्रा करके दो दिन पहले पहुँच चुके हैं और ये याद कर रहे हैं कि, ‘’दो दिन पहले, मुझे मेरे दोस्त ने या पिता ने या टीचर ने क्या बोल दिया था?’’ मन समय है क्यूँकी वो लगातार समय में ही यात्रा करता है। मन इस क्षण में रह ही नहीं सकता। आप में से कुछ हैं, जो इस क्षण में है। आप में से कुछ हैं जो ध्यान दे रहे हैं? क्या वो अतीत या भविष्य में हैं? समय का अर्थ ही है या तो अतीत या भविष्य।

आप में से जो लोग ध्यान दे रहे हैं क्या वो समय में है? वो समय में नहीं है न? और बड़ी मज़ेदार बात निकल के आई। जो समय में नहीं है, उसका समय ख़राब नहीं हो रहा। और जो समय में है, वो समय बर्बाद कर रहा है। जो ठीक अभी मौजूद है, समय में है, वो इस क्षण का ठीक अभी-अभी पूरा-पूरा सदुपयोग कर रहा है। और जो इस क्षण में नहीं है, जो समय में है, अतीत या भविष्य की कल्पनाओं में खोया हुआ है, वही है जो समय ख़राब कर रहा है।

मन की गतिविधियाँ, ये जो मन में विचार उठते रहते हैं। मन समय है और ये मन ही है, जो समय बर्बाद करता है। मन की गतिविधि और किसी लिए नहीं पर बस समय बर्बाद करने के लिए होती है। मन की कोई भी गतिविधि समय बर्बाद करना ही है क्यूँकी मन की गतिविधि के होने का अर्थ ही है ध्यान का न होना।


सत्र देखें : आचार्य प्रशांत: जो समय में है वो समय बर्बाद कर रहा है  


आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम:

  • अद्वैत बोध शिविर

हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा:  +91 – 8376055661

  •   आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण (कोर्स)

आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com  या

 संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

  •    जागृति माह

    जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर। जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का            हिस्सा बन सकते हैं।

    आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

     सम्पर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

  •  आचार्य जी से निजी साक्षात्कार

आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

  संपर्क करें:  सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917


  सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न:  http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट:  https://goo.gl/fS0zHf

 

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2 टिप्पणियाँ

    • नमस्कार,

      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन की ओर से हार्दिक अभिनन्दन!

      यह चैनल प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित किया जाता है एवं यह उत्तर भी उनकी ओर से आ रहा है |

      बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहें हैं|

      फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:
      _______________________________________________

      1. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
      यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।

      इस विलक्षण अवसर का लाभ उठाने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com
      या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91-9818585917

      2: अद्वैत बोध शिविर:
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन द्वारा आयोजित अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अलौकिक अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित ३५+ बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
      इसके अतिरिक्त, हम बच्चों और माता-पिता के रिश्तों में प्रगाढ़ता लाने हेतु समर्पित बोध-शिविर का आयोजन करते हैं।

      इन शिविरों का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com
      या संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661

      3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण:
      आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।

      सत्र का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com
      या संपर्क करें: श्री अपार: +91-9818591240

      4. जागृति माह:
      फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित आधारभूत विषयों पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।

      सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर
      या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917
      _______________________________________________

      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगे।

      सप्रेम,
      प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन

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