आप आज जगें , जीवन आज बदले, चुनाव आपको करना है।

आप जो कष्ट झेल रहे हैं, मैं आपसे कह रहा हूँ, “वो आपका प्रारब्ध नहीं है।” आप जो ठोकरें खा रहे हैं, उनमें कोई अनिवार्यता नहीं है। जो आपका समय व्यर्थ गया आज तक, उसका व्यर्थ जाना आवश्यक नहीं था। आगे भी जो आप माने बैठे हैं की जीवन ऐसे गठित होगा,वो वैसे गठित हो, ज़रूरी नहीं है। आप आज जगें , जीवन आज बदले, चुनाव आपको करना है। एक ओर है, आपका स्वभाव। एक और है वो जो आप हैं ही और दूसरी ओर है वो जो आपने अपने आपको मान रखा है। सही चुनाव करिए ना।

आपने अपने आपको जो मान रखा है, उसमें वैसे भी आपको क्या मिल रहा है? अपने दिल को छुएँगे तो टीस उठेगी। मन को देखेंगे तो उस पर छाले ही छाले दिखेंगे। क्या मिला है? है कोई जिसका मर्म घावों से न भरा हुआ न हो? है कोई जिसका अन्तःस्थल लहूलुहान न हो? है कोई जो आनन्द जीता हो और आनंद पीता हो? आईने के सामने खड़े होते हैं और आईना बता देता है, “तनाव! तनाव!तनाव! विषाद, विषाद, विषाद।” अपनी बोझिल आत्मा को देखिये। आज तक के आपके चुनावों ने आपको यही दिया है। लटका हुआ चेहरा, क्लांत आँखें।

दूसरा चुनाव करा जा सकता है, आपके पास ताकत है। दुनिया आपको जो कुछ मानने को प्रेरित करती रही है, मैं कहूँगा, “मजबूर करती रही है।” आपमें योग्यता है कि उसको ध्यान से  देखें और पूछें, “क्यों? कैसे? क्या वास्तव में?” और इतना भी पूछने का मन न करे तो ध्यान से देख भर लीजिये। आपकी आँखों में वो आग होगी जो धूल को जला देगी। “ध्यान की ज्योति,” ऐसा तो आपने सुना होगा। मैं आपसे कहता हूँ, “ध्यान की ज्वाला|” ज्योति भर नहीं। ज्योति तो मात्र प्रकाशित करती है। ज्वाला जला जलती है। ध्यान से अपने समाज को, अपने जीवन को, अपने रोज़ मर्रा के ढंगों को, अपनी बातचीत को, अपने सम्बन्धों को देखें तो ज़रा। और ये मजबूरी न अनुभव करें कि कुछ बदला नहीं जा सकता, कि कोई छुटकारा नहीं है। सब बदल सकता है। कुछ भी अपरिहार्य नहीं है।

ये श्रद्धा रखिये की सत्य के साथ, सत्य की दिशा में जो कुछ भी होगा, शुभ ही होगा। शुरू में आपको थोड़ी अर्चण आ सकती है, थोड़ा डर लगेगा। उस डर के साथ रह लीजिये। सत्य से, आत्मा से, केंद्र से कभी किसी का कोई अशुभ नहीं हुआ है, हो ही नहीं सकता। आप कह रहे हैं जिसका नाम शुभ है वो आपके लिए अशुभ निकल जाएगा? कैसे? आप कह रहे हैं जो आनंदरूपा है, वो आपको विषाद दे जाएगा। कैसे? आप कह रहे हैं जो मुक्ति रूपा है, वहाँ आप फंस जाओगे, बेड़ियाँ पड़ जाएँगे। कैसे? आप कह रहे हैं कि वो जो एक मात्र सुन्दर है, सुन्दरतम है, उसकी वजह से आपके जीवन में कुरूपताएँ आ जाएँगी? क्या गलत डर है ये? इन डरों को भी ध्यान से देखो तो जल जाएँगे।



लेख पढ़ें: तुम्हारी प्रकृति है भूल जाना, और है स्वभाव भूलकर भी न भूल पाना

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