कोई भी आदमी, जिस चीज़ की तलाश में है, वो है परमात्मा।

कोई भी आदमी, जिस चीज़ की तालाश में है, वो है परमात्मा। उस चीज़ को नाम तुम कुछ भी दे सकते हो, तुम क्या नाम देते हो, वो तुम्हारी समझ पर, और तुम्हारी नासमझी पर निर्भर करता है। तुम ये नाम भी दे सकते हो कि तुम्हें एक कोठी बनवानी है। तुम कोठी में परमात्मा खोज रहे हो। तुम ये भी कह सकते हो, कि तुम्हें बहुत सारा पैसा चाहिए। तुम पैसे में आत्यन्तिक शान्ति खोज रहे हो। पर जो कीमती बात है, वो है ‘आत्यन्तिक’। कि मुझे उसमें आखिरी शान्ति मिल जाएगी। हो सकता है, तुम ये भी कह रहे हो, कि नहीं, जीवन भर मुझे तो भटकना है, मुझे तो भटकने में मौज है, मैं तो यात्री हूँ। अगर तुम यात्री होने की बात करते हो, तो तुम्हारे लिए यात्रा परमात्मा हो गयी। हर आदमी, जिसको अंततः खोज रहा है, उसका नाम – परमात्मा। ठीक है?

तुम किसी औरत के पास जाते हो, कोई औरत किसी आदमी के पास जाती है। दोनों, वास्तव में, न आदमी से सरोकार रख रहे हैं, न औरत से सरोकार रख रहे हैं, हर आदमी को परमात्मा चाहिए। तुम इसमें भी परमात्मा खोज रहे हो, इन सवालों में भी, उस पानी में भी, खाना खाने जाओगे, उसमें भी, कोई नौकरी करोगे, उसमें भी, किसी से मिलोगे उसमें भी, और सम्भोग के क्षण में, औरत में भी। हर आदमी, औरत के माध्यम से परमात्मा को पाना चाहता है; हर औरत, आदमी के माध्यम से परमात्मा को पाना चाहती है। यही कारण है, कि आदमी और औरत का रिश्ता, कभी बहुत पक्का हो नहीं पाता।

और इसी बात ने हमें ये भी बता दिया है, कि वो रिश्ता पक्का कैसे हो सकता है। कैसे हो सकता है? आदमी को परमात्मा होना पड़ेगा। तुम किसी से रिश्ते में हो, और वो तुम पर ध्यान नहीं देती, एक ही तरीका है, परमात्मा हो जाओ। क्योंकि वो परमात्मा खोज रही है, तुम परमात्मा होने से इंकार करते हो। तुम्हारा हठ है, तुम परमात्मा होओगे नहीं, फिर तुम कहते हो, तुम्हें चाहती नहीं, प्यार नहीं करती। तुम वो हो ही नहीं जो वो खोज रही है। वो परमात्मा खोज रही है। जितने भी लोगों को रिश्ते में तकलीफें हों, उनको एक सलाह दिए देता हूँ, ‘परमात्मा हो जाओ’। रिश्ते ठीक हो जाएँगे। क्योंकि जिससे तुम रिश्ते में हो, वो तुम्हें नहीं खोज रहा, तुम हो कौन? वो परमात्मा खोज रहा है|

हर आदमी सिर्फ और सिर्फ परमात्मा खोज रहा है। हर औरत, सिर्फ और सिर्फ परमात्मा खोज रही है। तुम्हारी पत्नी, तुम्हारी शक्ल में अगर परमात्मा पाएगी, तुम्हारी दासी हो जाएगी। नहीं पाएगी, तो तुम लाख कोशिश कर लो, तुम्हारे पास नहीं आने की। दो चार दिन, हो सकता है आ जाए, उसकी भी शारीरिक भूख है, अपनी शारीरिक भूखों को पूरा करने के लिए या कभी तुम्हारा हृदय रखने के लिए, कभी किसी और कारणवश – हो सकता है आ जाये। लेकिन रिश्ता अतृप्ति से भरा हुआ रहेगा।

रिश्ते में तृप्ति तो तभी आएगी, जब तुम्हें उसमें वो दिखे जो तुम्हें अंततः चाहिए, और उसे तुममें वो दिखे जो उसे अंततः चाहिए। अगर कठिनाईयाँ मिल रही हैं, अगर रिश्तों में उलझाव हैं, तो ये मत पूछो कि में उसके साथ क्या करूँ, पूछो, अपने साथ क्या करूँ। तुम्हारा तुमसे रिश्ता ठीक नहीं है। तुम गलत राह पर चल रहे हो, इस गलत राह पर तुम्हें जो भी मिल रहा है, वो गलत ही होगा। जो गलत राह पर चल रहा है, उसे जो भी मिलेगा, उससे गलत रिश्ता। पक्षी, उससे गलत रिश्ता, ढाबा, उससे गलत रिश्ता, पेट्रोल पंप, उससे गलत रिश्ता। गलत राह पर, जो रिश्ता है, गलत है। सही राह पर जो रिश्ता है, सही है। जो परमात्मा की ओर जा रहा है, उसका एक पक्षी से जो रिश्ता बनेगा, वो कैसा होगा? सही होगा। जो परमात्मा की ओर जा रहा है, उसका इस कुर्सी से जो रिश्ता बनेगा वो? सही होगा। जो परमात्मा की ओर जा रहा है, उसका अपने भाई से जो रिश्ता बनेगा वो? सही होगा|



पूर्ण लेख पढ़ें: कामवासना और प्रेम में क्या अंतर है?

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