वह छोटे से छोटा है, और बड़े से बड़ा

New Microsoft Office PowerPoint Presentation (2)The kingdom of heaven is like a mustard seed that a man planted in his field. Although it is the smallest of all seeds, yet it grows into the largest of garden plants and becomes a tree so that the birds of the air come and nest in its branches.”

Mathew (13:31, 13:32)

“वह सब बीजों से छोटा तो है पर जब बढ़ जाता है तब सब साग पात से बड़ा होता है; और ऐसा पेड़ हो जाता है, कि आकाश के पक्षी आकर उस की डालियों पर बसेरा करते हैं॥”

मैथ्यू (13:31, 13:32)

 

आचार्य प्रशांत: जीसस कह रहे हैं कि वो सूक्ष्म-अतिसूक्ष्म है। सत्य, सूक्ष्म, अतिसूक्ष्म है, छोटे से छोटा है, और दूसरी दृष्टि से देखें तो बड़े से बड़ा है, जीसस ने दोनों दृष्टियों की चर्चा एक ही वचन में कर दी है। यही काम उपनिषद् भी करते हैं, “अणोरणीयान् महतो महीयान्” और बात आगे बढ़ाते हैं – छोटे से छोटा, बड़े से बड़ा है। अपने होने में वो इतना सूक्ष्म, इतना विरल है, कि दिखाई ही नहीं देगा, पकड़ में नहीं आएगा। और अपने प्रभावों में वो इतना वृहद है, कि उसके अलावा कुछ है नहीं जो दिखाई दे।

बात समझो।

तुमसे कहा जाए, “जाओ, सत्य को खोज कर ले आओ। ये चारों तरफ तुम्हें पेड़-पौधे, जंगल अभी दिख रहे हैं, ये पानी है, और हवा है, इसमें जाओ सत्य को खोज कर ले आओ।” तो तुम कर लो खूब खुदाई, तुम छान लो पानी को, तुम्हें नहीं मिलेगा। और तुम वापस आ जाओगे। इतना सूक्ष्म है इतना विरल है, सब कुछ देख लिया, खोद लिया, छान लिया, खोज लिया, नहीं पाया, और फिर आ करके बैठोगे, और अपने चारों ओर देखो, तब कहोगे, “उसके अलावा और है क्या?”

सूक्ष्म इतना, कि पकड़ में न आए, और वृहद इतना कि उसके बाहर कुछ नहीं। ठीक वही बात यहाँ पर कह रहे हैं जीसस कि एक छोटे से छोटे बीज की तरह है, जो समस्त बीजों में सबसे छोटा हो। पर वो ऐसा है कि जब उसे बो दिया, तो उससे जो वृक्ष पैदा होता है, उससे बड़ा कोई वृक्ष नहीं और उस वृक्ष में आ कर के, अस्तित्व पूरा शरण लेता है। जीसस तो इतना ही कह रहे हैं कि आकाश के पक्षी आ कर के उसमें  घोसला बनाते हैं, आकाश के पक्षी ही नहीं, ज़मीन के पशु भी, और मनुष्य भी, सब उसमे शरण पाते हैं। छोटे से छोटा है, और बड़े से बड़ा है। और ये वो दोनों अतियाँ हैं जिन्हें हम पकड़ नहीं सकते।

एक सीमा से कुछ छोटा हो जाए, किसी और आयाम में पहुँच जाए, हम उसे नहीं पाएँगे। और कुछ ऐसा हो जाए, जो बिल्कुल ही असीम है, तो भी हम उसे नहीं पाएँगे।

आदमी की मजबूरी ये है कि देख पाने के लिए, अस्ति कह पाने के लिए, उसे सीमाएँ चाहिए। जिसकी सीमा नहीं, आदमी को उसका संज्ञान भी नहीं मिल सकता। जो सूक्ष्मतम हो गया, वो भी असीम हो जाता है, क्योंकि उसकी अब कोई सीमा नहीं बची, बिंदु की कोई सीमा नहीं होती, और जो वृहदतम हो गया, वो भी असीम हो गया, क्योंकि अनंत की कोई सीमा नहीं होती। आदमी दोनों को ही नहीं जान सकता। आदमी तो बीच का है, जो सीमाओं के भ्रम में जीता है।

जीसस कह रहे हैं, “समझो, समस्त जीवित सीमित हैं।” जब जीसस कह रहे हैं कि सारे पक्षी आकर के उस वृक्ष में प्रश्रय लेंगे, तो वो कह रहे हैं सीमित सदैव असीमित में ही सहारा पाएगा। सीमित को सीमित का सहारा नहीं हो सकता, दूसरे शब्दों में वो ये कह रहे हैं कि संसारी का सहारा कभी संसार नहीं हो सकता। संसार, संसार के सहारे पर न चल पाएगा। संसार को अगर चलना है, तो उसे सत्य का ही सहारा चाहिए। सत्य के बीज से जो पेड़ उदित होता है, उसी में पनाह पाएँगे सारे पक्षी, सारे पशु, और तुम। बात समझ रहे हो? आदमी, आदमी का सहारा न बन पाएगा। तुम कुछ कर लो, आदमी से आस जोड़ोगे, आस टूटेगी। और हर आस, हर टूटी हुई आस, तुम्हारे दिल को एक नया घाव दे कर के जाएगी।

आदमी के साथ चलोगे, साथ छूटेगा। हर छूटा हुआ साथ एक और घाव बन जाएगा। उसका साथ पकड़ो जो निभाएगा, उसकी प्रीत करो, उसका सहारा मांगो। उसके साथ रह कर कभी धोखा नहीं खाओगे। अपने आप को उसके हवाले छोड़ो। उसी का पेड़ है, जिसमें तुम्हारा घर बनेगा। अभी हम घर की बात कर रहे थे ना? उसी का पेड़ है जिसमे तुम्हारा घोंसला बड़े आराम से बनेगा, तैयार ही बैठा है, बस तुम्हे जाकर के उसमे समा जाना है। आ रही है बात समझ में?

ये पीछे (एक चर्च कि ओर इशारा करते हुए) क्रॉस है, इसका मतलब समझते हो क्या है? इसका मतलब ठीक वही है जो अभी कह रहा था। डोडो (पक्षियों की एक विलुप्त प्रजाति) हो जाना बेहतर है, जीसस डोडो  हो लिए। ये जो सूली है, ये जीसस की मौत की कहानी है। इसी पर लटके थे ना? लटकना बेहतर समझा उन्होंने, और जवान आदमी थे, अभी पूरी उम्र पड़ी थी जीने के लिए। उन्होंने कहा, “ठीक, इसपर लटकना बेहतर है, पर तुम्हारे जैसा होना स्वीकार नहीं करूँगा।”

मस्त, मगन, बुद्धिमान, श्रद्धावान, खूबसूरत नौजवान थे, थोड़ा सा समझौता कर लेते तो क्या बिगड़ जाता? माफ़ी माँग लेते, कह देते, “नशे में गलत बोल गया।” क्या बिगड़ जाता? कह देते, “बहक गया था, यूँ ही ऊटपटांग बोलने लग गया था।” नहीं, उन्होंने कहा, “लटका दो, कोई बात नहीं।” और ये भी उन्होंने हिंसा में नहीं कहा कि लटका दो, कोई बात नहीं, अकड़ में नहीं कहा, बड़े सहज, सरल तरीके से कहा कि तुम्हें अगर यही उचित लगता है तो करो यही। मुझे तो दिख रहा है कि ये उचित नहीं है। पर अब जो वो चाहे, पिता कि यही मर्ज़ी है, तो यही ठीक। और उससे मैं यही कहूँगा कि तुम्हें भी माफ़ करे, क्योंकि तुम समझ ही कहाँ रहे हो कि तुम कर क्या रहे हो।

इसको ध्यान से देख लो और समझ लो। उस राह चल कर अगर इस तक पहुँचते हो, तो परम सौभाग्य है तुम्हारा। ये जीसस के कष्ट के चिन्ह का चिन्ह नहीं है, ये जीसस के अमर हो जाने का चिन्ह है। इसको देख कर ये मत याद करना कि जीसस इसपर तड़पे थे, ये याद करना कि जब इसपर भी थे, तब भी मन आनंदित था। आनंदित न होता, तो टूट गए होते। जब इस पर भी थे, तब भी मन में श्रद्धा अडिग रही, अडिग न रहती तो रो पड़े होते।

उन्होंने ये नहीं कहा कि ये क्या सिला मिल रहा है मुझे? मैंने तो दुनिया का भला चाहा, दुनिया को ऊँची से ऊँची बात कही, और ये क्या मिल रहा है मुझे? ना, बिलकुल नहीं कहा। दुनिया से किसी प्रतिफल की अपेक्षा ही नहीं थी उन्हें। कुछ मांग ही नहीं रहे थे। मैंने वो करा, मैं वो कर रहा हूँ जो उचित है, बाकी तुम जानो। और मैं जा भी रहा हूँ, तो अपने वचन को छोड़ के जा रहा हूँ पीछे, अपनी सीख, अपना जीवन छोड़ के जा रहा हूँ पीछे, दे के ही जा रहा हूँ। अस्तित्व ऐसा ही है। इसको भूलना मत।

हम जिस तरीके से चले हैं, इंसान की जो पूरी यात्रा रही है, वो ऐसी ही रही है, और हम ऐसे ही हो गए हैं कि जीसस जब भी आएगा, उसको यही भेंट दी जाएगी। पर ये भेंट कष्ट की नहीं है। जो जीसस को जानते नहीं सिर्फ वही कहेंगे कि बुरा हुआ। न, जो जीसस को जानते नहीं सिर्फ वही ये कहेंगे कि जीसस ने अपनी कुर्बानी दे दी, न, कैसी कुर्बानी? जैसे ये चिड़िया गा रही है ना मौज में, जीसस इतनी ही मौज में इसपर चढ़ गये थे।



सत्र देखें: आचार्य प्रशांत, यीशु मसीह पर: वह छोटे से छोटा है, और बड़े से बड़ा

निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-


१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. परमचेतना नेतृत्व
नेतृत्व क्या है? असली नायक कौन है?
एक असली नायक क्या लोगों को कहीं आगे ले जाता है, या वो लोगों को उनतक ही वापस ले आता है?
क्या नेतृत्व प्रचलित कॉर्पोरेट और शैक्षिक ढाँचे से आगे भी कुछ है?
क्या आप या आपका संस्थान सही नेतृत्व की समस्या से जूझ रहे हैं?

जब आम नेतृत्व अपनी सीमा तक पहुँच जाए, तब आमंत्रित कीजिये ‘परमचेतना नेतृत्व’ – एक अनूठा मौका आचार्य प्रशान्त जी के साथ व्यग्तिगत व संस्थागत रूप से जुड़कर जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को जानने का।
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८. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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९. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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१०. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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११. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.com पर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998
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  1. “आदमी के साथ चलोगे, साथ छूटेगा। हर छूटा हुआ साथ एक और घाव बन जाएगा। उसका साथ पकड़ो जो निभाएगा, उसकी प्रीत करो, उसका सहारा मांगो। उसके साथ रह कर कभी धोखा नहीं खाओगे। अपने आप को उसके हवाले छोड़ो। उसी का पेड़ है, जिसमें तुम्हारा घर बनेगा। अभी हम घर की बात कर रहे थे ना? उसी का पेड़ है जिसमे तुम्हारा घोंसला बड़े आराम से बनेगा, तैयार ही बैठा है, बस तुम्हे जाकर के उसमे समा जाना है।”

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      यह बहुत ही शुभ है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहे हैं|

      फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-
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      १. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
      यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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      २: अद्वैत बोध शिविर:
      अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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      ३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
      आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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      ४. जागरुकता का महीना:
      फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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      ५. आचार्य जी के साथ एक दिन
      ‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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      ६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
      ‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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      ७. परमचेतना नेतृत्व
      नेतृत्व क्या है? असली नायक कौन है?
      एक असली नायक क्या लोगों को कहीं आगे ले जाता है, या वो लोगों को उनतक ही वापस ले आता है?
      क्या नेतृत्व प्रचलित कॉर्पोरेट और शैक्षिक ढाँचे से आगे भी कुछ है?
      क्या आप या आपका संस्थान सही नेतृत्व की समस्या से जूझ रहे हैं?

      जब आम नेतृत्व अपनी सीमा तक पहुँच जाए, तब आमंत्रित कीजिये ‘परमचेतना नेतृत्व’ – एक अनूठा मौका आचार्य प्रशान्त जी के साथ व्यग्तिगत व संस्थागत रूप से जुड़कर जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को जानने का।
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      ८. स्टूडियो कबीर
      स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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      ९. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
      यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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      १०. त्रियोग:
      त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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      ११. बोध-पुस्तक
      जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

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      सप्रेम,
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      फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-
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      १. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
      यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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      २: अद्वैत बोध शिविर:
      अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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      ३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
      आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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      ४. जागरुकता का महीना:
      फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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      ५. आचार्य जी के साथ एक दिन
      ‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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      ६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
      ‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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      ७. परमचेतना नेतृत्व
      नेतृत्व क्या है? असली नायक कौन है?
      एक असली नायक क्या लोगों को कहीं आगे ले जाता है, या वो लोगों को उनतक ही वापस ले आता है?
      क्या नेतृत्व प्रचलित कॉर्पोरेट और शैक्षिक ढाँचे से आगे भी कुछ है?
      क्या आप या आपका संस्थान सही नेतृत्व की समस्या से जूझ रहे हैं?

      जब आम नेतृत्व अपनी सीमा तक पहुँच जाए, तब आमंत्रित कीजिये ‘परमचेतना नेतृत्व’ – एक अनूठा मौका आचार्य प्रशान्त जी के साथ व्यग्तिगत व संस्थागत रूप से जुड़कर जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को जानने का।
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      ८. स्टूडियो कबीर
      स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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      ९. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
      यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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      १०. त्रियोग:
      त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
      ~~~~~~
      ११. बोध-पुस्तक
      जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

      अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
      फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks
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      इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.com पर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998
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      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पायेंगे।

      सप्रेम,
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