पाया है, कुछ पाया है

New Microsoft Office PowerPoint Presentation (2)पाया है, कुछ पाया है

 

पाया है कुछ पाया है

सत गुरु मेरे अलख लखाया है

कहूं बैर पड़ा कहूं बेली है

कहूं मजनू है कहूं लेली है

कहूं आप गुरु कहूं चेली है

आप आप का पंथ बताया है

कहूं महजत का करतारा है

कहूं बणिया ठाकर द्वारा है

कहूं बैरागी जयधारा है

कहूं सेखण बनि आया है

कहूं तुरक मुसल्ला पढ़ते हो

कहूं भगत हिंदु जप करते हो

कहूं घोर घुण्डे में पड़ते हो

घर घर लाड लड़ाया है

बुल्लाह शाह बेमुहताज हुइआ

महाराज मिल्या काज हुइआ

दरसन पिया इलाज हुइआ

आप आप में आप समाया है

~बुल्ले शाह

आचार्य प्रशांत: ये अच्छा नाम है, “बेमुहताज”। जितने भी हमने ब्रह्म के नाम सुने हैं, उनमें अब एक ये भी जोड़ लो – बेमुहताज।

वो श्लोक है ना  –

“अनाश्रित कर्मफलम् कार्यम् कर्म करोति।” वही, अनाश्रित, बेमुहताज। ठीक है। वही है, जो निर्भर नहीं करता। तो बेपरवाह तो था ही, अब बेमुहताज भी। ये उसका एक लक्षण है, कि वो बेमुहताज है, किसी पर निर्भर नहीं करता।

और जब तक तुम इंसान हो, तुम क्या हो?

श्रोता: मोहताज। और जो बेमोहताज है, वो बेपरवाह हुआ।

वक्ता: और जो बेमुहताज हो गया, अब वो साधारण इंसान नहीं रहा। और जो वास्तव में जितना बेमुहताज होता जाएगा, वो उतना उसके करीब पहुँचता जाएगा, जो बेमुहताज है। क्योंकि जैसे जैसे तुम अपनी निर्भरता कम करते जाते हो, वैसे वैसे तुम किसके करीब पहुँचते जाते हो?

उसके!

और जब बिलकुल वही हो जाते हो तो? “तत त्वं असि”, तुम वही हो। तुम वही हो।

तो जिन्हें उसको पाना हो वो क्या करें? फार्मूला क्या निकल आया?

श्रोतागण: आत्मनिर्भर।

आचार्य जी: सिंपल। ठीक है ना? जिन्हें उसे पाना हो, वो जहाँ-जहाँ पाएँ कि कोई निर्भरता है, उससे मुक्त होते जाएँ। जो तू चाहे मुक्त को, मुक्त जैसा ही हो जा।

कल कह रहे थे ना, बात हो रही थी, कि छोड़ने की बात छोड़ो, पाने की बात करो। ये वही है, इसको इसीलिए लिया है। क्योंकि इसमें बार बार, बुल्ले शाह क्या कह रहे हैं?

पाया है, कुछ पाया है। बाकी कहानी बाद की है, बाकी कहानी तो हो जाएगी, अपने आप हो जाएगी। पहले पाना जरूरी है। पहले पाना ज़रूरी है। जिसने पा लिया, उसके आगे की कहानी अपने आप बढ़ जाती है। पाओ। फिर छूटना हो जायेगा, कि त्याग करना और ये सब। ठीक है ना?

श्रोता: सर ये नेति नेति की जो पूरी प्रक्रिया है…

आचार्य जी: तुम वो नेति नेति अभी कर नहीं पाओगे, अगर तुमने पहले कुछ पा नहीं लिया है। वरना तुम कहोगे कि छोड़ कैसे दूँ? छोड़ने के लिए, पहले पाना ज़रूरी है। नेति नेति भी, शुरू तब हो पायेगी जब पहले पाने का कुछ कम से कम एहसास हो। तब ही नेति नेति शुरू हो पायेगी, नहीं तो नेति नेति शुरू ही नहीं हो पायेगी। एहसास भी काफी है।

देखो, आम आदमी नेति नेति नहीं कर पाता ना। क्योंकि उसकी ज़िंदगी में श्रद्धा बिलकुल सिफर है। थोड़ी सी भी अगर श्रद्धा हो, तो फिर नेति नेति हो सकती है। हल्का एहसास भी हो, हलकी सी झलक भी हो। तो काम शुरू हो जाएगा। पर अगर वो हलकी सी झलक भी नहीं मिली है, तो फिर तुम्हारा काम शुरू ही नहीं हो सकता।

श्रोता: “प्रभु की साधना में लग जाने और उसका आनंद पा लेने पर तो कुछ और ही हो गयी हूँ, अब मुझे कौन पहचानेगा? गुरु ने मुझे शिक्षा दी कि यह मार्ग ऐसा है कि वहाँ अन्य कोई आता या जाता नहीं है। उसने मुझे निरपेक्ष सौंदर्य का दर्शन करा दिया है, और मैं उसी के रंग में ऐसी रंग गयी हूँ, कि अद्वैत जोर दिखाने लगा है। वह अनादि पुरुष है, और जन्म मरण से परे है, किन्तु वह प्रियतम प्रत्यक्ष हो कर सुगढ़ और परोक्ष रूप में निर्गुण दिखाई देता है। प्रिये से तदागर होने के पश्चात अब मेरा तो नामोनिशान ही नहीं रह गया है। उससे एक रूप होने के बाद सभी कलह कलेश, मिट गए हैं। प्रिय ने स्वयं अपना सौंदर्य दिखाया। उसने स्वयं को कलंदर, मस्त और मवाली, आदि रूपों में दर्शन दिए। अब हंसों की चाल देख चुकने के बाद स्वभावतः मैं कौओं की चाल तो भूल ही गयी।”

आचार्य जी: पर याद रखना, कौओं की चाल पहले नहीं भूलती है, पहले क्या होता है?

पहले हंस की चाल दिखती है। हंसों के बीच में पहले कुछ दिन जब रह लेते हो, फिर नहीं कौए पसंद आते।

पहले ही कहोगे कि तुम कौओं के बीच में हो, चलो छोड़ दो, छोड़ दो, तो नहीं होगा। पहले उनको कुछ दिन हंसों के पास ले कर के आओ। फिर उन्हें कौए ठीक नहीं लगेंगे।



सत्र देखें: आचार्य प्रशांत, संत बुल्ले शाह पर: पाया है, कुछ पाया है (There is something I have attained)

निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-


१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.com पर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998
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2 टिप्पणियाँ

  1. “जिन्हें उसे पाना हो, वो जहाँ जहाँ पाएँ कि कोई निर्भरता है, उससे मुक्त होते जाएँ। जो तू चाहे मुक्त को, मुक्त जैसा ही हो जा।”

    मुक्ति का एक मात्र उपाय: अपनी निर्भरता छोड़ते चलो। धन्यवाद आचार्य जी।

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    • नमश्कार,

      यह सन्देश आप तक प्रशान्तअद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों के माध्यम से पहुँच रहा है, जो इस प्रोफाइल की देख-रेख करते हैं।

      प्रशान्तअद्वैत फाउंडेशन की ओर से हार्दिक अभिनन्दन!

      यह बहुत ही शुभ है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहे हैं|

      फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-
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      १. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
      यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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      २: अद्वैत बोध शिविर:
      अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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      ३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
      आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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      ४. जागरुकता का महीना:
      फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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      ५. आचार्य जी के साथ एक दिन
      ‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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      ६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
      ‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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      ७. परमचेतना नेतृत्व
      नेतृत्व क्या है? असली नायक कौन है?
      एक असली नायक क्या लोगों को कहीं आगे ले जाता है, या वो लोगों को उनतक ही वापस ले आता है?
      क्या नेतृत्व प्रचलित कॉर्पोरेट और शैक्षिक ढाँचे से आगे भी कुछ है?
      क्या आप या आपका संस्थान सही नेतृत्व की समस्या से जूझ रहे हैं?

      जब आम नेतृत्व अपनी सीमा तक पहुँच जाए, तब आमंत्रित कीजिये ‘परमचेतना नेतृत्व’ – एक अनूठा मौका आचार्य प्रशान्त जी के साथ व्यग्तिगत व संस्थागत रूप से जुड़कर जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को जानने का।
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      ८. स्टूडियो कबीर
      स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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      ९. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
      यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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      १०. त्रियोग:
      त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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      ११. बोध-पुस्तक
      जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

      अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
      फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks
      ~~~~~~
      इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.com पर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998
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      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पायेंगे।

      सप्रेम,
      प्रशान्तअद्वैत फाउंडेशन

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