आचार्य प्रशांत, रवीन्द्रनाथ टैगोर पर: वासना निर्बल और निराधार क्यों?

New Microsoft Office PowerPoint Presentation (2)तुम मुझे रोज़मर्रा की निर्बल और निराधार वासना से बचते रहने की शक्ति देते रहो

~ गीतांजलि

 

प्रश्न: आचार्य जी, रवीन्द्रनाथ टैगोर, वासना को निर्बल और निराधार क्यों कह रहे हैं?

आचार्य प्रशांत: वासना को रवीन्द्रनाथ निर्बल इसीलिए कह रहे हैं, क्योंकि वासना में बल होता तो वासना उसको पा ही लेती ना जिसके लिए वो उठती है।

हर इच्छा, हर कामना, हर वासना चाहती क्या है?

शान्ति।

पर वासना को कभी शान्ति मिलती है? मिली? तो इसीलिए उसे रवीन्द्रनाथ कह रहे हैं, “निर्बल।”

और क्यों कह रहे हैं, “निराधार?” क्योंकि जिसका आधार होता है, आधार माने बुनियाद, जिसका आधार होता है वो अडिग रहता है, वासना को कभी अडिग रहते देखा है? इच्छा कभी अडिग रहते देखी है? क्या होता है इच्छा को? झट उठी, झट गिरी। कभी इसीलिए गिरी कि पूरी हो गयी। और कभी इसीलिए गिरी कि पूरी होने की आस नहीं रही। है कोई इच्छा जो शाश्वत बनी रह जाती हो? जो इच्छा शाश्वत बनी रह जाए, उसे फिर इच्छा नहीं मुमुक्षा कहते हैं। वही हर जीव की सनातन इच्छा है – मुक्ति, मुमुक्षा। पर हम उस इच्छा को दरकिनार कर, छोटी, टुच्ची इच्छाओं में लिप्त हो जाते हैं। दो रुपया, चार रुपया, बीस हज़ार, पच्चीस हज़ार।

भक्ति सबल होती है, क्यों? क्योंकि वो उसको पा लेती है जो उसका ध्येय होता है। वासना निर्बल होती है, क्यों? क्योंकि वो उसको नहीं पा पाती, जो उसका ध्येय होता है। भक्ति सबल है, ज्ञान सबल है, ध्यान सबल है, समर्पण सबल है, तपस्चर्या सबल है। ये पा लेते हैं। कम से कम, पा सकते हैं। वासना की तो प्राप्ति की सम्भावना ही शून्य है, वो न पाती है और न ही पा सकती है; अति दुर्बल है। दुर्बल बहुत है, लेकिन ज़िद और घमंड उसमें पूरा है। ये बात मज़ेदार है। ज़िद और घमंड हमेशा तुम दुबर्लता के साथ ही देखोगे। जो जितना कमज़ोर होगा, वो उतना ज़िद्दी, उतना घमंडी। और जहाँ बल आ जाता है, वहाँ सर झुक जाता है। बल, किस में कहा हमने कि होता है? भक्ति में। और भक्त का सर तो? झुका रहता है। जो बलवान है वो झुका रहेगा। और जो जितना दुर्बल है, वो उतना अकड़ेगा। वो उतना अपने में फूला फूला फिरेगा। और वो उतना असफल जियेगा।

हाँ, क्या कह रहे थे, अब फिर बोलो?

श्रोता: शांति और आराम में क्या अंतर है?

वक्ता: हाँ।

एक मोटा आदमी कुर्सी पर बैठ के आराम कर रहा है। और एक स्वस्थ, सुडौल, मज़बूत काठी का छरहरा आदमी दूसरी कुर्सी पर बैठा हुआ है। समस्या दोनों को नहीं है ना। बाहर से देखने में ऐसा लगता है जैसे दोनों विश्राम में हैं। पर उनमें से एक शांत है और दूसरे को मात्र सुख है, सुविधा है, कम्फर्ट है। प्रमाण इसका ये है कि शान्ति सावधिक नहीं होती, झट जाने को तैयार नहीं होती। और जिसको तुम सुख या सुविधा कहते हो, आराम कहते हो, वो बहुत तात्कालिक होता है, वो लगातार भागने को तैयार होता है। एक धोखा होता है वो।

तुम्हें लग रहा है कि सब ठीक है, पर तुम इतने मोटे हो कि तुम्हारे भीतर पाँच व्याधियाँ पनप रही हैं। तुम्हें लग भर रहा है कि सब ठीक है। और ऐसा नहीं कि भविष्य ही तुम्हारा भ्रम तोड़ेगा, ठीक अभी अगर तुम पहाड़ चढ़ने की कोशिश करो, तो तुम्हें दिख जाएगा कि तुम्हारा आराम झूठा है। आराम तुरंत बदल जाएगा, बेचैनी में। आराम तुरंत बदल जायेगा हाय राम में। फिर तुम्हें पूछना होगा अभी तो आप कहते थे नहीं नहीं नहीं, हमें तो तोंद के साथ भी आराम है। अब, “हाय राम, हाय राम” क्यों? न पहाड़ पर चढ़ते हो, न उतरते हो, कौन सा आराम है तुमको? समझ में आ रही है बात?

और शान्त आदमी, वो जिसको हमने कहा कि सुडौल है, सबल है, वो शान्ति में चढ़ जाएगा और शान्ति में ही उतर भी जाएगा, उसकी शान्ति निर्विघ्न रहेगी। अंतर समझ रहे हो ना?

तो, तुम कह सकते हो कि शान्ति वो आराम है जो निर्बाध रहता है, अक्षुण्ण रहता है, अविचल रहता है हम जिन आरामों में रहते हैं वो आराम धोखेबाज़ी के हैं। क्योंकि वो अभी हैं और अभी होने के कारण ही वो अगले पल नहीं रहेंगे। वो अभी होने के कारण ही अगले पल नहीं रहेंगे। तुम्हें जो आराम मिला है उससे पूछना। धोखा देगा क्या? वो तुमसे आँख मिला कर न नहीं बोल पाएगा। कुछ ऐसा पाओ जो सदा का आराम दे जाए। जिसके बिछुड़ने की कोई सम्भावना ही न हो,तब मिला आराम। इसीलिए नींद वास्तविक आराम नहीं है क्योंकि वो? टूटेगी।

वास्तविक आराम को जानने वालों ने कहा है, जागृत शुषुप्ति। कि जग भी रहे हो तो ऐसा है कि सोये हुए हो। अब ऐसा आराम है कि सोये तो सोये, हम तो जगे में भी सोये। अब हमारा आराम अविरल है। अब तोड़ो हमारी नींद। तुम नींद तोड़ भी दोगे तो भी हम नींद में ही हैं। कभी नींद में नींद है, और कभी? जागे में नींद है। ये शान्ति है।

शान्ति वो, जो आती, जाती नहीं। शान्ति वो जो धोखा नहीं देती। तुम अगर कहो कि अभी शांत हूँ, थोड़ी देर में अशांत हो जाऊँगा, तो तुम्हारी शान्ति सिर्फ झूठा आराम थी। उस शान्ति के समपर्क में रहो, जिसे कोई हिला नहीं सकता। उसके चक्कर में फंस गए जिसे कोई भी हिला देता है, तो घनचक्कर हो जाओगे। जो कुछ भी तुम्हें सुख देता हो, तुम उसी से कहना, कि ठीक है तू सुख देता है, चल कुछ ऐसा उपाय करें कि ये सुख कभी छिने न। और उस उपाय में लग जाना, ईमानदारी से। अगर तुम्हारा सुख ऐसा हो सकता है कि कभी छिने ना, तो वो फिर सुख नहीं है, सत्य है। सुख मात्र नहीं है वो फिर, शाश्वत सत्य है। और अगर तुम्हारा सुख ऐसा  हो ही नहीं सकता कि कभी छिने ना, तो उस सुख को धूल और राख जान के झाड़ देना



 सत्र देखें: आचार्य प्रशांत, रवीन्द्रनाथ टैगोर पर: वासना निर्बल और निराधार क्यों?

निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
~~~~~
२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
~~~~~
३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
~~~~~
४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
~~~~~
५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
~~~~~
६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
~~~~~~
७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
~~~~~
८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
~~~~~~
९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
~~~~~~
१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

~~~~~~
इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.com पर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

 

2 टिप्पणियाँ

  1. “भक्ति सबल होती है, क्यों? क्योंकि वो उसको पा लेती है जो उसका ध्येय होता है। वासना निर्बल होती है, क्यों? क्योंकि वो उसको नहीं पा पाती, जो उसका ध्येय होता है। भक्ति सबल है, ज्ञान सबल है, ध्यान सबल है, समर्पण सबल है, तपस्चर्या सबल है। ये पा लेते हैं। कम से कम, पा सकते हैं। वासना की तो प्राप्ति की सम्भावना ही शून्य है, वो न पाती है और न ही पा सकती है; अति दुर्बल है। दुर्बल बहुत है, लेकिन ज़िद और घमंड उसमें पूरा है। ये बात मज़ेदार है। ज़िद और घमंड हमेशा तुम दुबर्लता के साथ ही देखोगे। जो जितना कमज़ोर होगा, वो उतना ज़िद्दी, उतना घमंडी। और जहाँ बल आ जाता है, वहाँ सर झुक जाता है। बल, किस में कहा हमने कि होता है? भक्ति में। और भक्त का सर तो? झुका रहता है। जो बलवान है वो झुका रहेगा। और जो जितना दुर्बल है, वो उतना अकड़ेगा। वो उतना अपने में फूला फूला फिरेगा। और वो उतना असफल जियेगा।”

    कटु है, पर सत्य है। हमारी जिन्दगी झूठे प्रेमों और झूठे संबंधों की बस कहानी बन कर रह जाती है।

    पसंद करें

    • नमश्कार,

      यह सन्देश आप तक प्रशान्तअद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों के माध्यम से पहुँच रहा है, जो इस प्रोफाइल की देख-रेख करते हैं।

      प्रशान्तअद्वैत फाउंडेशन की ओर से हार्दिक अभिनन्दन!

      यह बहुत ही शुभ है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहे हैं|

      फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-
      ___

      १. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
      यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
      ~~~~~
      २: अद्वैत बोध शिविर:
      अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
      ~~~~~
      ३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
      आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
      ~~~~~
      ४. जागरुकता का महीना:
      फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
      ~~~~~
      ५. आचार्य जी के साथ एक दिन
      ‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
      ~~~~~
      ६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
      ‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
      ~~~~~~
      ७. परमचेतना नेतृत्व
      नेतृत्व क्या है? असली नायक कौन है?
      एक असली नायक क्या लोगों को कहीं आगे ले जाता है, या वो लोगों को उनतक ही वापस ले आता है?
      क्या नेतृत्व प्रचलित कॉर्पोरेट और शैक्षिक ढाँचे से आगे भी कुछ है?
      क्या आप या आपका संस्थान सही नेतृत्व की समस्या से जूझ रहे हैं?

      जब आम नेतृत्व अपनी सीमा तक पहुँच जाए, तब आमंत्रित कीजिये ‘परमचेतना नेतृत्व’ – एक अनूठा मौका आचार्य प्रशान्त जी के साथ व्यग्तिगत व संस्थागत रूप से जुड़कर जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को जानने का।
      ~~~~~
      ८. स्टूडियो कबीर
      स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
      ~~~~~
      ९. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
      यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
      ~~~~~~
      १०. त्रियोग:
      त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
      ~~~~~~
      ११. बोध-पुस्तक
      जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

      अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
      फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks
      ~~~~~~
      इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.com पर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998
      __

      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पायेंगे।

      सप्रेम,
      प्रशान्तअद्वैत फाउंडेशन

      पसंद करें

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s