भोलापन माने क्या?

New Microsoft Office PowerPoint Presentation (2)प्रश्न: आचार्य जी, अभी आपने कहा था कि जो विपरीत पर खड़ा है वो हमेशा पहचानेगा कि राजनीति क्या चल रही है या ये सब। पर ऐसा हम सुनते हैं ना कि जो भोला रह जाता है उसका ज़माना भी नहीं रहता। तो अगर हम अपने ऑफिस में ही हैं चाहे, और हम नहीं देख रहे, पॉलिटिक्स से ध्यान हटा दिया है, ये बातें कभी कभी तंग भी करती हैं इंसान को, नहीं ध्यान दे रहे, जिसको जो बोलना है बोलने दें। पर कई बार ऐसा हो जाता है कि वो उलटा ही पड़ जाता है। तो फिर क्या फायदा हुआ हमारे भोलेपन का?

आचार्य प्रशांत: भोलापन शब्द जो है, वो, वो मायने नहीं रखता जैसे आमतौर पर समझे जाते हैं? भारत में भोला किसको कहा गया?

श्रोता: शंकर को।

आचार्य जी: तो बेवक़ूफ़ तो नहीं होता होगा भोला? या शिव का अर्थ होता है बेवक़ूफ़?

शिव तो बेवकूफी के विपरीत हैं, विपरीत भी नहीं हैं, आगे हैं, अतीत हैं।

भोला होने का मतलब है कि तुम किसी चीज़ से अछूते हो। जब तुम कहते हो, उदाहरण के लिए, आई ऍम इनोसेंट ऑफ़ दिस क्राइम। तो इसका क्या अर्थ होता है? “ये गुनाह मैंने नहीं किया, मेरा इससे कोई लेना देना नहीं है – ये है भोला होने का अर्थ।” “मेरा इससे कोई लेना देना नहीं है, मैं इसके बिना ही भरपूर हूँ, पूर्ण हूँ” – ये होता है भोलेपन का अर्थ। तुम जो कर रहे हो मेरा उससे कोई लेना देना ही नहीं है। क्योंकि तुम जो कर रहे हो वो छोटी और टुच्ची बात है। मुझे करना क्या है?

मेरी हालत ऐसी है कि मैं बैठा हुआ हूँ और भरपूर यहाँ आम ही आम रखे हैं। मस्त, रसीले, पीले, हथेली जितने बड़े बड़े, क्या? आम। और वहाँ पड़ी हैं चुसी हुई गुठलियाँ, जूठी। मैं उनकी ओर देखूँगा? मेरा उनसे कुछ भी लेना देना नहीं है, ये है भोलापन। मुझे इतना मिला हुआ है कि मैं तुम्हारी इन गंदी गुठलियों की ओर देखूँ क्यों? तुम ये सब मेरे सामने लाते हो, वो मेरी निगाह के सामने तो आता है, मेरी निगाह के भीतर नहीं आता। तुम जो कुछ भी मेरी आँख के सामने लाते हो, वो सामने ही रह जाता है, आँख के माध्यम से भीतर प्रवेश नहीं कर पाता। ये है भोलापन। बात समझ में आ रही है?

स्वास्थ्य है भोलापन। कि बीमारी है पर कहाँ है? बाहर है। मेरे भीतर नहीं प्रवेश कर पा रही। आई ऍम इनोसेंट ऑफ़ डिजीज, मैं निर्मल हूँ, मैं गन्दा नहीं हो सकता। ये इन्नोसेंस  है, ये भोलापन है। इसका अर्थ ये नहीं है कि मैं जानता नहीं कि गंदगी क्या है,  बेवकूफी होगी। ऐसा नहीं है कि मैं समझता नहीं हूँ कि झूठन किसको बोलते हैं और गुठली की नीरसता किसको बोलते हैं, और मल और मलिनता किसको बोलते हैं, ऐसा नहीं कि मैं उसको जानता नहीं। मैं उसको जानता हूँ, मेरा उससे कोई लेना देना नहीं है। नो बिज़नेस देयर, नो ट्रक देयर

भोले और भोंदू में अंतर होता है ना? भोंदू कौन? जिसको समझ में ही नहीं आ रहा कि क्या चल रहा है। और भोला कौन? जो कह रहा है कि जो चल रहा है वो चल रहा होगा, हम मौज में हैं। जो परम चीज़ है वो हमें समझ में आ गयी है, अब ये तुम्हारी छोटी-मोटी निकृष्ट नासमझियों का हम करें क्या? हमें ये सुहाती ही नहीं, हमें इसमें कोई रस ही नहीं है, हम पढ़ना ही नहीं चाहते, हम सुनना ही नहीं चाहते। हम सुनना नहीं चाहते कि ये सब तुम क्या कानाफूसी कर रहे हो। ऐसा नहीं कि तुम हमें बताओगे तो हमें समझ नहीं आएगा, समझ हमें आएगा, समझ आएगा पर रस नहीं आएगा।

इन दोनों का अंतर समझते हो? इन दोनों में अंतर ये है, कि तुम मुझसे आकर के बोलो कि आप आज बरकुरजा खाएंगे? अब मुझे समझ में ही नहीं आया कि तुम मुझे क्या खिला रहे हो। चूँकि समझ ही नहीं आया तो मुझे उसमें कोई रस भी नहीं आया। ये भोंदूपन है। भोंदूपन में रस इसीलिए नहीं आता क्योंकि? समझ ही नहीं आया। और भोलापन क्या है? कि तुमने आकर के कहा, खीर खाओगे? मैं जानता हूँ खीर क्या है, पर मैं ना सिर्फ जानता हूँ, मैं अच्छी तरह जानता हूँ खीर क्या है, और मैं जानता हूँ खीर में हिंसा है। और मैं कह रहा हूँ, ना। हम प्रेम से ऐसे भरे हुए हैं, खीर की हिंसा बर्दाश्त नहीं कर पाएँगे। तो हमें खीर में कोई रस उठ नहीं रहा ।

हम जानते हैं खीर क्या है, पर जानने के बाद भी हमें खीर में रस नहीं उठ रहा। और जब तुमने कहा था कि क्या खाओगे? बरकुरजा। तब हमें रस क्यों नहीं उठ रहा था? क्योंकि हम जानते ही नहीं हैं कि क्या है। वो अज्ञानी का सुख है। उसी को बोलते हैं, इग्नोरेंस इस ब्लिस। कि तुम्हें पता ही नहीं चला कि तुमसे कौन सा मौका चूक गया, तुम इसीलिए मौज की नींद सो रहे हो। जैसे कोई सो रहा हो और उसकी ट्रेन छूट जाए। उसे कोई दुःख होगा? तुम सो रहे हो, तुम्हारी ट्रेन छूट गयी, तुम्हें कोई दुःख है? ये इग्नोरेंस इस ब्लिस है। भोलापन बिलकुल अलग बात है, भोलापन  और अज्ञान को कभी एक मत बना देना ।

अज्ञान में तुम्हें पता है कि ये सब क्या चल रहा है, लेकिन तुम्हें उसमें कोई रस नहीं आता। तुम उसमें लिप्त नहीं होना चाहते। तुम कहते हो, लेना एक ना देना दो, मैं अलग, मैं असंग, मेरा इस पूरे जगत व्यापर से ताल्लुक क्या? तुम कहते हो ठीक है, जो हो रहा है हम जानते हैं तुम क्या कह रहे हो। पर हम प्रलोभित नहीं होते। हमें आकर्षण ही नहीं उठता हम क्या करें? तुम रिझा लो, तुम डरा लो। तुम जब हमें क्रोधित करते हो, हमें नहीं बुरा लगता। और तुम फिर जब आके मनाते हो, के माफ़ी  मांगते हो, तब हमें कुछ ख़ास अच्छा भी नहीं लग जाता ।

हम स्वस्थ हैं, विशुद्ध, परिपूर्ण हैं अपने आप में – ये है भोलापन। तो भोलापन का मतलब ये नहीं होता कि कुत्ते का बच्चा उठा लिया और बोले, “कितना भोला कुत्ते का बच्चा है।” यही तो करते हो भोलेपन के नाम पर। तुमने अनगढ़ता को, अनभिग्यता को, अज्ञानता को, भोलेपन का पर्याय बना लिया है। ये भूल है। तुम्हें तो जो जितना भोंदू मिल जाता है, तुम उसको तुरंत कह देते हो, भोला है वो।

याद रखना, भोले शिवशंकर हैं, उनसे नीचे के किसी को भोला मत कह देना।

बहुत मज़ा है इसमें। जिन्हें पता है कि ये क्या चल रहा है। लेकिन फिर भी, कोई रस नहीं आता। रस इसीलिए नहीं आता क्योंकि भीतर रस की गंगा बह रही है पहले ही। तुम ये दो चार बूँद दिखा के हमें क्या ललचाओगे?

श्रोता: आचार्य जी अभी आपने बोला कि हमारी वृत्ति, हमारे पैटर्न हैं, उसकी वजह से हम वृत्तियों के गुलाम हैं। तो हम वो कैसे पहचानें और क्या हम इसमें कुछ कर सकते हैं?

आचार्य जी: दोनों ही तो कर रहे हैं आप। बंधक रहने का इंतज़ाम भी आप ही कर रहे हैं, और मुक्ति की प्रार्थना भी आप ही कर रहे हैं। अब आप बताइये आपको करना क्या है? दोनों आप करे जा रहे हैं, अब आप चुनाव करिये। अपनी दास्ताँ के सारे प्रबंध आपने करे। खुद करे ना? अपने आप तो नहीं हो गए? आपके दस्तखत के साथ हुए। और रोज़ रोज़ परमात्मा से गुज़ारिश भी आप ही करते हैं, क्या? कि मुक्ति दे दो। तो दोनों तो आप कर ही रहे हो। दो हो आप, अलग अलग। एक वो जिसे क़ैद में बड़ा मज़ा है और दूसरा वो जिसे पंख फैला के उड़ना है, आप दोनों हो। अब आप चुन लो कि इन दोनों में से मुझे क्या होना है, अतः क्या करना है।

हम इंसान नहीं हैं, हम गृहयुद्ध हैं। हमारा दाँया पाँव हमारे बाएंँ पाँव को लंगड़ी लगा रहा है। और हमारा दाँया हाथ हमारे बाँये हाथ को चिकोटी काट रहा है। तुम सोचो ना, तुम चलो और खुद को ही लंगड़ी मारो बार बार। ऐसे हैं हम, अपने ही ख़िलाफ़ खड़े हैं। अब चुनिए, यही बचा है करने को।

श्रोता: पर वो चलना तो, आचार्य जी हमारी अपनी वृत्तियों की वजह से ही तो नहीं हो पाता ।

आचार्य जी: कुछ भी हो सकता है। चुनने में बड़ी गड़बड़ हो सकती है ।

श्रोता: वो वृत्ति ही जब, तो चुनाव भी तो हमारे खराब ही होंगे?

आचार्य जी: ये अगर आपको याद रहे तो चुनाव सही हो जायेगा ।

(श्रोतागण हँसते हैं)

जिसको ये याद रह गया उसका चुनाव खराब हो ही नहीं सकता। मेरी वृत्तियाँ बड़ी खराब हैं, और जो कुछ मैं वृत्तियों के वशीभूत हो कर के चुनता हूँ, वो बड़ा भारी पड़ता है। जिसको ये याद रह गया, वो तो बच गया। और जिसे अपने में बड़ा विश्वास है, कि साहब हम तो चुन ले जाएँगे अपने हिसाब से ! तो वो फँस गया ।

श्रोता: जो पहले ही चुन चुके हैं, उसको कैसे सुधार सकते हैं?

आचार्य जी: फ्रिज में बहुत सारी बोतलें रखी हैं, जिनकी एक्सपायरी डेट बीत गयी। वो गन्धा रही हैं, क्या करती हैं आप उनका? दूध का पैकेट ले के आयीं थीं, और उस पर क्या लिखा था? बेस्ट बिफोर? नौ मार्च 2018,आज रात बारह बजे के बाद क्या करेंगी फिर उसका?

तो फेंकना होगा ना, ये थोड़े ही ना कहेंगी कि इसको चुना था मैंने कभी। संसार में तो आप जो भी कुछ चुनेंगे, वो सावधिक होगा। उसकी एक मियाद, एक अवधि होगी। और वो अवधि पूरी हो जाए तो उसको?

विसर्जित करो भाई, जाने दो, उसे मुक्ति दो। जानते हो उस फ्रिज के भीतर क्या रखा है? उस फ्रिज के भीतर ‘हम’ रखे हैं। हम बहुत पुराने हैं। और अपने आप को ही हम विसर्जित नहीं होने दे रहे ।


 सत्र देखें: आचार्य प्रशांत: भोलापन माने क्या?

 निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.com पर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

 

2 टिप्पणियाँ

    • नमश्कार,

      यह सन्देश आप तक प्रशान्तअद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों के माध्यम से पहुँच रहा है, जो इस प्रोफाइल की देख-रेख करते हैं।

      प्रशान्तअद्वैत फाउंडेशन की ओर से हार्दिक अभिनन्दन!

      यह बहुत ही शुभ है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहे हैं|

      फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-
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      १. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
      यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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      २: अद्वैत बोध शिविर:
      अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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      ३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
      आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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      ४. जागरुकता का महीना:
      फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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      ५. आचार्य जी के साथ एक दिन
      ‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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      ६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
      ‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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      ७. परमचेतना नेतृत्व
      नेतृत्व क्या है? असली नायक कौन है?
      एक असली नायक क्या लोगों को कहीं आगे ले जाता है, या वो लोगों को उनतक ही वापस ले आता है?
      क्या नेतृत्व प्रचलित कॉर्पोरेट और शैक्षिक ढाँचे से आगे भी कुछ है?
      क्या आप या आपका संस्थान सही नेतृत्व की समस्या से जूझ रहे हैं?

      जब आम नेतृत्व अपनी सीमा तक पहुँच जाए, तब आमंत्रित कीजिये ‘परमचेतना नेतृत्व’ – एक अनूठा मौका आचार्य प्रशान्त जी के साथ व्यग्तिगत व संस्थागत रूप से जुड़कर जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को जानने का।
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      ८. स्टूडियो कबीर
      स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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      ९. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
      यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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      १०. त्रियोग:
      त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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      ११. बोध-पुस्तक
      जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

      अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
      फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks
      ~~~~~~
      इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.com पर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998
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      आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पायेंगे।

      सप्रेम,
      प्रशान्तअद्वैत फाउंडेशन

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