जब मन सिक हो जाता है, तो उसे कहते हैं मानसिकता

आचार्य प्रशांत: तुम ये कह रहे हो, कि मेरे दृष्टिकोण से परिणाम पर अंतर पड़ता है के नहीं? ये कह रहे हो? ये जानना चाहते हो?

तो, ये तो तुम सब सोचते ही यही हो ।

श्रोता: आपसे एक सवाल पूछना है …

आचार्य जी: तुम इसका तो सुनो पहले सवाल ! अब ये क्या कर रहे हो देखो, एक सवाल चल रहा है, तुमने वो सवाल सुना भी नहीं । अपने में ही खोए हुए थे ।

हम सब दृष्टिकोण में ही तो ज़िंदा हैं । रवैए का क्या मतलब होता है? ‘मानसिकता’ । मैं मानसिकता को बड़े मज़े तरीके से देखता हूँ । मैं कहता हूँ,

जब मन ‘सिक’ हो जाता है, तो उसे कहते हैं ‘मानसिकता’ ।

दृष्टिकोण का मतलब ये है, कि मैं पहले से ही एक नज़रिया बना के बैठा हूँ । जब मैं पहले से ही एक नज़रिया बना के बैठा हूँ, तो अब क्या मैं जान सकता हूँ, कि हक़ीक़त क्या है?

अगर मेरा किसी भी परिस्थिति या इंसान की तरफ एक नजरिया है , तो क्या ये मेरे लिए सम्भव है जान पाना की वास्तविक रूप से चल क्या रहा है ? पर तुम तो दृष्टिकोण को बहुत क़ीमती चीज़ समझते हो । टी-शर्ट्स चलती हैं, “योर एटीट्यूड डेटरमिन्स योर एल्टीट्यूड (आपका दृष्टिकोण आपकी ऊँचाई निर्धारित करता है)।”

दृष्टिकोण अपने आप में बड़ी बेहूदी चीज़ है ।

दृष्टिकोण का मतलब ये है कि मैं पहले ही कुछ पूर्वाग्रही, पक्षपातपूर्ण, तरीके से चल रहा हूँ ।

हाँ?

पाकिस्तान के बारे में हमारा क्या दृष्टिकोण  है? एक पाकिस्तानी बैट्समैन कितनी भी अच्छी बैटिंग कर रहा हो, ताली बजायी जाएगी? भले ही उसने ‘क्लासिकल कवर ड्राइव लगाया हो ! दिखाई भी पड़ता है? बड़ा मुश्क़िल हो जाता है । बस यही दिखाई पड़ता है कि यार, जीत ना जाएँ । एक चौका और मार दिया ।

एक बार जब आप कोई रवैया रखते हैं, तो आप पूरी तरह से वास्तविकता से अलग हो जाते हैं । क्योंकि सारी दृष्टि भूत से आती है । अभी रवैए का मतलब है कि मन को एक विशेष आकार में ढाल दिया गया है ।

नहीं आ रही बात समझ में?

अब वो जो एक तरह का ढला हुआ आकार है, वो परिणाम को तो प्रभावित करेगा ही करेगा और वो हमेशा एक घटिया परिणाम होगा ।

श्रोता: अगर हमारी दृष्टि सकारात्मक है तो?

आचार्य जी: सकारात्मक दृष्टि कुछ होती ही नहीं । ये तुम्हें किसने बोला कि ‘सकारात्मक’ और ‘नकारात्मक’ कुछ होता है? ‘दृष्टिकोण ’ अपने आप में ही पूर्णतः निरुपयोगी है ।

‘सकारात्मक’ और ‘नकारात्मक’ दृष्टिकोण  क्या होता है? वो वहाँ बोर्ड लगा हो, उस पर कुछ लिखा हो । दो लोग बैठे हैं, दोनों ही ध्यान नहीं दे रहे, दोनों को ही समझ में नहीं आ रहा क्या है? एक ‘सकारात्मक दृष्टि’ वाला है, वो कहता है, पता है उस पर क्या लिखा है? मेरी बीवी बहुत खूबसूरत होगी । एक ‘नकारात्मक दृष्टि ‘ वाला है, वो कहता है, पता है उस पर क्या लिखा है? मेरी बीवी हिडिम्बा होगी ।

(श्रोतागण हँसते हैं)

ये दोनों ही बेवक़ूफ़ हैं कि नहीं हैं? दोनों ही को पता है क्या कि वास्तविकता क्या है? दोनों को ही पता है क्या, वास्तविकता क्या है? पर जो ‘सकारात्मक दृष्टि’ वाला होगा वो खुश हो जायेगा, ‘कहेगा देखा प्रमाणपत्र मिल गया’ ! फोटो-वोटो खींच लेगा । बहुत बढ़िया । जो ‘नकारात्मक दृष्टि ‘ वाला होगा, वो कहेगा, मैं तो जानता ही था ख़ुदकुशी कर लेनी चाहिए थी कल । कल ही कर ली होती तो आज ये जानने को ना मिलता ।

(श्रोतागण हँसते हैं)

दोनों को ही कुछ भी पता है, कि हक़ीक़त क्या है?

दृष्टि  का मतलब ये है कि मैं कभी भी वास्तविकता नहीं जान पाऊँगा । मैं अपनी ही दृष्टि में जिए जा रहा हूँ । मेरा वास्तविकता से कोई सरोकार नहीं है । वास्तव में किसी भी के साथ वास्तविकता को जानना असम्भव है ।

श्रोता: परन्तु, अगर आभासी जीवन से बहुत संतुष्टि मिल रही हो तो वास्तविकता जानने की ज़रुरत है क्या?

आचार्य जी: आभासी जीवन कभी भी पूर्णतः संतुष्टि नहीं दे सकता । क्योंकि वास्तविकता किसी ना किसी ज़रिये से अपने आप को महसूस करवाएगी ही ।

आप एक बुलबुले में रह सकते हैं, पर एक ना एक दिन वो बुलबुला फटेगा ही । वो आभासी जीवन कभी न कभी चकनाचूर होगा ही होगा । आप सदैव एक बुलबुले में नहीं रह सकते । उदाहरण के लिए, कोई सामने दरवाज़े से आये, और आप एक आभासी दुनिया में जी रहे हों; आप सोच रहे हैं कि ये मेरा मित्र है । जैसे कि मानसिकताएँ भूत से आती हैं, उसी भूत को नींव बना के आप कह रहे हैं, ये मेरा मित्र है । आपकी उसके प्रति एक मानसिकता है । सही? पर वो व्यक्ति तो वही है, जो है । क्या वो भी आपकी मानसिकता के आकार के अनुकूल होगा? वो आएगा, तुम अपनी कल्पनाओं में खोए रहो, कि मेरा तो दोस्त है । पर जब वो आएगा, तुमसे मिलेगा, तो वो हक़ीक़त तो स्पष्ट हो ही जानी है ना? फिर आएगी पीड़ा । वो आभासी जीवन, वो बुलबुला, फटेगा और पीड़ा देगा । क्योंकि मनुष्य की नियति ही है, कि आगे या पीछे, वास्तविकता से मिलन होना ही है ।

हमने क्या कहा, हमारा तत्व क्या है? हमारी?

श्रोतागण: बुद्धिमत्ता ।

आचार्य जी: तुम उसको कितना भी चादरों से दबा दो, वो बुद्धिमत्ता अपने आप को व्यक्त करेगी । उसी का नाम वास्तविकता है । और तुम को पता तो चल ही जाएगा कि असलियत क्या है । और फिर तुम्हें दुःख होगा, बहुत अफ़सोस होगा । अगर तुम कल्पनाओं में जी रहे हो, तो एक दिन जब वास्तविकता अपने आप को व्यक्त करेगी, तो फिर तुम्हें बहुत अफ़सोस होता है ।

मेरी कक्षा में मुझे सब ने बोला है कि मैं गणित में बहुत अच्छा हूँ ! तुम्हारी तो जे.ई.ई. एंट्रेंस की परीक्षा में टॉप १०० में रैंक आनी ही आनी है । और मेरे कस्बे में मैं ही सबसे महारथी हूँ । जिस कोचिंग केंद्र में पढ़ने जाता हूँ, वहाँ सबसे पहले मैं ही हल करता हूँ, कैलकुलस के सारे सवाल, और ये मेरा आभासी संसार है । मेरे छोटे से, जितना मुझे दूसरों ने बता दिया, एक संकुचित कुछ । और फिर जे. ई. ई. का परिणाम आता है । और मेरी पूरे भारत  में रैंक आयी है तीस हज़ार । अब क्या होगा? बुलबुला तो फूटा ही ना? और उसमें कब तक खुश रह लोगे? वो टूटेगा, वो फटेगा । और जब फटेगा तो क्या होगा? जिस दिन परिणाम निकलेगा कि तीस हज़ार रैंक आयी है, तो उस दिन क्या होगा? और वो तीस हज़ार रैंक आयी ही क्यों है? क्योंकि तुम आभासी संसार में रह रहे थे । अगर तुम आभासी संसार में नहीं होते तो क्या तुम्हारा इतना बुरा हाल होता?

बहुत लोगों को यहाँ भी ताज्जुब हुआ होगा ना, जब रैंक आयी थी? कितने लोगों को हुआ था? और आज तक अफ़सोस है ! कितने लोगों को लगता है, गलत जगह फँस गए? मैं तो किसी बहुत अच्छी जगह के लायक था ।



सत्र देखें : जब मन सिक हो जाता है, तो उसे कहते हैं मानसिकता 


निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.comपर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

2 टिप्पणियाँ

  1. नमन,

    यह सन्देश आप तक प्रशान्तअद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों के माध्यम से पहुँच रहा है, जो इस प्रोफाइल की देख-रेख करते हैं।

    प्रशान्तअद्वैत फाउंडेशन की ओर से हार्दिक अभिनन्दन!

    यह बहुत ही शुभ है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहे हैं|

    फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-
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    १. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
    यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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    २: अद्वैत बोध शिविर:
    अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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    ३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
    आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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    ४. जागरुकता का महीना:
    फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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    ५. आचार्य जी के साथ एक दिन
    ‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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    ६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
    ‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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    ७. परमचेतना नेतृत्व
    नेतृत्व क्या है? असली नायक कौन है?
    एक असली नायक क्या लोगों को कहीं आगे ले जाता है, या वो लोगों को उनतक ही वापस ले आता है?
    क्या नेतृत्व प्रचलित कॉर्पोरेट और शैक्षिक ढाँचे से आगे भी कुछ है?
    क्या आप या आपका संस्थान सही नेतृत्व की समस्या से जूझ रहे हैं?

    जब आम नेतृत्व अपनी सीमा तक पहुँच जाए, तब आमंत्रित कीजिये ‘परमचेतना नेतृत्व’ – एक अनूठा मौका आचार्य प्रशान्त जी के साथ व्यग्तिगत व संस्थागत रूप से जुड़कर जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को जानने का।
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    ८. स्टूडियो कबीर
    स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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    ९. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
    यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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    १०. त्रियोग:
    त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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    ११. बोध-पुस्तक
    जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

    अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
    फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks
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    इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.com पर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998
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    आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पायेंगे।

    सप्रेम,
    प्रशान्तअद्वैत फाउंडेशन

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