सुन्दर वर्तमान दीजिये अपने आपको

जब भी कभी किसी सत्कार्य में डूब जाओगे, पाओगे कि अतीत लापता हो गया । ना अतीत बचा ना भविष्य ।

जीवन को एक सार्थक दिशा दो । मन को एक समुचित केंद्र दो ।

दुःख, जीवन है आदमी का ! दुःख से मुक्ति दो तरह की होती है – एक होती है दुःख से क्षणिक मुक्ति, उसको कहते हैं, ‘सुख’। और दूसरी होती है दुःख से पूर्ण मुक्ति, उसको कहते हैं ‘आनंद’ । मन को ‘दुःख’ से मुक्ति तो चाहिए ही चाहिए । किसी भी तरीके से चाहिए । ‘सुख’ होता है, भूत में और भविष्य में । दुःख से क्षणिक मुक्ति मिलती है, भूत में और भविष्य में । और दुःख से वास्तविक मुक्ति मिलती है, ‘आनंद’ में, जो कि होता है ‘वर्तमान’ में ।

आनंद का अर्थ ही होता है, ‘स्वयं से मुक्ति’ ! ‘हम’ अपने ऊपर बहुत बड़ा बोझ होते हैं । और जब वो बोझ हटता है, तो मस्ती छा जाती है । उसको कहते हैं ‘आनंद’ ।

सुबह से शाम, चौबीस घंटे जो कर रहे हैं ना, उस पर दृष्टिपात कीजिये । पूछिए, इसमें ऐसा है क्या कि इसमें मन लग जाए, रम जाए ?

और घर में अगर मौज है, मजा है, तो वो घर से क्यों भागेगा? घर की ओर गौर से देखिये ! घर माने जीवन ।

सुन्दर वर्तमान दीजिये अपने आपको । तोहफा । फिर मन नहीं भागेगा । वर्तमान पर गौर करिये, उसमें सौंदर्य कितना है ! उसे सुन्दर करिये !



पूर्ण लेख पढ़ें : अतीत को पीछे कैसे छोड़ें?


 

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