हक़ीक़त क्या है?

जब ‘मन’ ‘सिक’ हो जाता है, तो उसे कहते हैं ‘मानसिकता’ ।

 

दृष्टिकोण अपने आप में बड़ी बेहूदी चीज़ है ।

दृष्टिकोण का मतलब ये है कि मैं पहले ही कुछ पूर्वाग्रही, पक्षपातपूर्ण, तरीके से चल रहा हूँ ।

 

‘सकारात्मक’ और ‘नकारात्मक’ दृष्टिकोण  क्या होता है? वो वहाँ बोर्ड लगा हो, उस पर कुछ लिखा हो । दो लोग बैठे हैं, दोनों ही ध्यान नहीं दे रहे, दोनों को ही समझ में नहीं आ रहा क्या है? एक ‘सकारात्मकदृष्टि’ वाला है, वो कहता है, पता है उस पर क्या लिखा है? मेरी बीवी बहुत खूबसूरत होगी । एक ‘नकारात्मकदृष्टि ‘ वाला है, वो कहता है, पता है उस पर क्या लिखा है? मेरी बीवी हिडिम्बा होगी ।

 

दृष्टि  का मतलब ये है कि मैं कभी भी वास्तविकता नहीं जान पाऊँगा । मैं अपनी ही दृष्टि में जिए जा रहा हूँ । मेरा वास्तविकता से कोई सरोकार नहीं है । वास्तव में किसी भी के साथ वास्तविकता को जानना असम्भव है ।



पूरा लेख पढ़ें: जब मन सिक हो जाता है, तो उसे कहते हैं मानसिकता


 

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