आज जो कुछ हो रहा है, उसको समझो

बच्चे पैदा कर लेने भर से कोई विशेष योग्यता तो नहीं आ जाती है । ना माँ में, ना बाप में ! अगर माँ-बाप, दोनों के मन में अंधेरा ही अंधेरा है, तो वही अंधेरा वो बच्चे को दे देते हैं ।

देखो, प्रजनन करना एक बात है, और ये क़ाबिलियत रखना कि आप गुरु बन पाओ बच्चे के लिए, वो बिलकुल दूसरी बात है, बिलकुल ही दूसरी बात है ।

शिक्षक होना एक बात है, और वाक़ई गुरु होना दूसरी बात है ।

क्या हम अतीत में जा कर अपना अतीत बदल सकते हैं? नहीं बदल सकते ! हम सिर्फ यह कर सकते हैं कि आज जो कुछ हो रहा है, हम उसको समझें । आज जो कुछ हो रहा है, हम उसको समझें ।



पूरा लेख पढ़ें: आचार्य प्रशांत: बचपन से ही पीते हो प्रभावों की घुट्टी


 

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