गुण अलग-अलग नहीं

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नानक के देखने कि दिशा भक्त की है, नीचे से ऊपर की। बीज से वृक्ष तक की।

कोई भी वस्तु, व्यक्ति और उसका गुण अलग-अलग नहीं है।

‘चीज़’ और ‘उसकी’ विशेषता कभी अलग या अलग नहीं होती है।

आप गुण मात्र ही है, और जो भी गुण आप दर्शा रहे है, बस वही अपने आप को जान लीजिए। उसके अलावा अपनी कोई छवि बनाने कि जरूरत है ही नहीं।

कल जो मैं था उससे आज में कोई अंतर नहीं पड़ना है। अभी में अंतर बस अभी से पड़ना है, यही अर्थ है शून्यता का।

तुम्हारी पिछली उपलब्धियाँ तुम्हारे किसी काम नहीं आएँगी क्योंकि अस्तित्व के लिए अगला-पिछला कुछ होता ही नहीं है,शून्य है। उनकी क्या कीमत है? शून्य׀ उनकी कोई कीमत नहीं है।

समझने वालों ने यही समझा है कि जीवन होता ही नहीं ׀ तुम किस जीवन की बात कर रहे हो? ९९९ किलोमीटर की कोई यात्रा तुमने कभी करी ही नहीं। वह यात्रा शून्य है। अर्थ सिर्फ उस कदम का है जिसे तुम अभी रख रहे हो। ठीक से रखोगे तो ठीक। गलत रखोगे तो फिसलोगे।

तुम भूल जाते हो कि चेतना प्रतिपल की है। तुम अतीत के सहारे पर वर्तमान को जीना चाहते हो और जो कोई अतीत को वर्तमान में लेकर आता है, वही कर्मफल को भुगतता है। कर्मफल किसके लिए है? कर्मफल उसी के लिए है जो अभी अतीत का कचरा ढो रहा हो और जो अतीत का कचरा ढोयेगा, उसी को अस्तित्व झटका दे देगा।

उसके मन पर अतीत हावी हो गया है। वह इस आखिरी कदम को पहले कदम की तरह नहीं देख रहा है। वह इस आखिरी कदम को एक कदम की तरह नही देख रहा है ׀ वह इस आखिरी कदम को, अभी लिए हुए कदम की तरह नही देख रहा है׀ वह इस आखिरी कदम को देख रहा है ९९९ क़दमों के बाद के १००० वें कदम की तरह। अतीत हावी है उसके ऊपर। अतीत हावी है तो सज़ा मिलेगी और वह सज़ा उस पल से आगे नहीं जा पायेगी।

तो कर्मफल किनके लिए है? मात्र नासमझों के लिए है। जिन्होंने अस्तित्व को जाना वे अच्छे से समझ जाएँगे कि कर्मफल जैसी चीज़ नहीं होती।

आप चूँक की बात कब करते हो जब आप अतीत को ले आते हो बीच में और तुलना करते हो ׀ आप कहते हो कि ९९९ कदम ठीक चलाये थे १००० वें कदम पर फिसला, चूँक हुई। चूँक सिर्फ इस कारण कह रहे हो क्योंकि इतिहास से तुलना कर रहे हो׀ कह रहे हो कि पहले नहीं करता था, अब हुई है तो चूँक होगी׀ वह चूँक नहीं है। तुलना करो ही मत׀ तुम उस गलती के अलावा कुछ और नहीं हो। अपने आप को बचाने की कोशिश मत करो। अपने इतिहास को गवाह की तरह मत खड़ा करो।

यह मत कहो कि तुम्हे समझ में तो आता है, पर ज़िन्दगी में नही उतार पाता हूँ। सीधे कहो कि मुझे समझ में ही नही आता है׀ जो समझ में आया है वह ज़िन्दगी में उतरने के लिए समय का इंतजार नही करता, वह ततिक्ष्ण उतरता है।

भूलना नहीं जो कर रहे हो, वही हो। अपने गुणों से हटके कोई वस्तु कुछ भी नहीं है।


पूरा लेख पढ़ें: आचार्य प्रशांत, गुरु नानक पर: हर कदम, पहला कदम

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